तिल के फायदे – Sesame Benefits in Hindi

तिल के फायदे – Sesame Benefits in Hindi


1. तिल के तेल से सीने को सेकने से सांस फूलना बंद हो जाता है।

2. बालों में तिल के तेल की मालिश करें। मालिश के आधा घण्टे बाद एक तौलिया भिगो कर, निचोड़ कर सिर पर लपेट लें, ठण्डा होने पर पुनः गर्म पानी में निचोड़ लपट ले। इस प्रकार पाँच मिनट गर्म लपेट रखें, फिर ठण्डे पानी से सिर धो लें। इस गर्म पानी में भिगो कर, निचोड़ कर सिर पर लपेट लें। इस से रूसी दूर हो जायेगी।

3. जिनके बाल सफेद हो गये हो, बाल झड़ते हों यदि वे नित्य तिल खायें और तेल लगायें तो उनके बाल लम्बे मुलायम व काले हो जायेंगे।

4. एक चम्मच लहसुन का रस, एक चम्मच तिल के तेल में मिलाकर जब तक बुखार न आये, एक-एक घंटे में 10-10 बूंद जीभ पर डाल कर चूसे। इस तरह चार दिन लगातार करने से मलेरिया ठीक हो जाता है।

5. अजवाइन और तिल मिलाकर खाने से बहमूत्रता ठीक हो जाती है।

6. तिल के बीज को गुड़ के साथ मिलाकर खाने से बार बार पेशाब को जाने से छुटकारा मिलता है।

7. नियमित रूप से तिल का तेल बवासीर (अर्श) पर लगाने से लाभ होता है।

8. 60 ग्राम काले तिल चबा-चबाकर खाकर, दही का सेवन करने से बवासीर से रक्त आना बन्द हो जाता है।

9. बथुए के कच्चे पत्ते पीसकर निचोड़ कर रस निकाल लें। दो कप रस में आधा कप तिल का तेल मिलाकर मंद-मंद आग पर गर्म करें। जब रस जलकर तेल ही रह जाये तो छान कर शीशी भर लें तथा प्रतिदिन सफेद दागों पर लगाने से सफेद दाग ठीक हो जाते है।

10. 50 ग्राम काले तिल, 25 ग्राम अजवाइन, 100 ग्राम गुड़ में मिला लें। इसे 8 ग्राम सुबह-शाम दो बार नित्य खाते रहने से बार-बार पेशाब जाना एवं बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना बन्द हो जायेगा।

11. तिल के तेल से मालिश करने से वात रोग में लाभ होता है।

12. 32 ग्राम काले तिल सुबह दांतुन के बाद बिना कुछ खाये-पीये धीरे-धीरे खूब चबा कर खायें। इसमें गुड़, चीनी कुछ भी न मिलायें। ऊपर से एक गिलास ठण्डा पानी पीयें, चाहें तो रात को भी इस तरह तिल खा सकते हैं। इस प्रयोग से दाँत मजबूत होंगे।

13. काले तिल और गुड़ हरेक 15 ग्राम मिलाकर दो कप पानी में उबालकर छान लें। ठंडा होने पर नित्य पीयें। कुछ दिन पीते रहने से बन्द हुआ मासिक-स्राव आरम्भ हो जायेगा।

14. काँटा चुभा हो, उसे सुई से कुरेदकर निकालने का प्रयास करें। यदि काँटा नहीं निकले तो तिल के तेल में नमक मिलाकर रूई भिगोकर काँटे पर रखकर पट्टी बाँधने से काँटा निकल जाता है।

15. तिल और ग्वार समान मात्रा में पीसकर पानी डालकर पकावें, फिर मोच या चोट वाली जगह पर लगावें। दर्द दूर हो जायेगा।

16. मोम का एक भाग, तिल का तेल चार भाग मिलाकर गर्म करके मरहम बना लें। इसे बिवाइयों पर लगाने से लाभ होता है।

17. दो चम्मच तिल का तेल, तारामीरा का तेल, दो चम्मच पिसी हुई राल, एक चम्मच पीला मोम (दवा में काम आने वाला)। इनका मरहम बना कर उसे लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

18. तिलों को पानी में चटनी की तरह पीसकर जले हुए पर मोटा लेप करें। जलन में लाभ होगा।