राहत इन्दौरी शायरी – Rahat Indori Shayari

Rahat Indori Shayari Ghazals :दोस्तों , अगर किसी को शायरी पसंद हो, वह राहत इन्दौरी साहब को न जानता हो ये तो हो नहीं सकता , क्योकि राहत इन्दौरी साहब ने शायरी , कविता  और गजल की दुनिया में इतना नाम कमा लिया है, कि एक इन्सान के लिए बहुत है और ये पहचान इनको विरासत में नहीं मिली है , ये पहचान इन्होने अपने आप बनाई है , तो आये दोस्तों  राहत इन्दौरी के कहे हुए कुछ प्रसिद्ध शायरी कविता और गजलें को पढ़ते है –राहत इन्दौरी की शायरी कविता और गजलें - Rahat Indori Shayari Poetry Ghazals

राहत इन्दौरी की शायरी कविता और गजलें – Rahat Indori Shayari Ghazals


राहत इंदौरी की मशहूर शायरी : Famous Shayari of Rahat Indori

अजनबी ख़्वाहिशें , सीने में दबा भी न सकूँ |
ऐसे ज़िद्दी हैं परिंदे ,  कि उड़ा भी न सकूँ ||


आँख में पानी रखो , होंटों पे चिंगारी रखो |
ज़िंदा रहना है तो , तरकीबें बहुत सारी रखो ||


रोज़ तारों को नुमाइश  में , खलल पड़ता हैं |
चाँद पागल हैं , अंधेरे में निकल पड़ता हैं ||


उसकी याद आई हैं , साँसों ज़रा धीरे चलो |
धड़कनो से भी इबादत में ,  खलल पड़ता हैं ||


ये हादसा तो किसी दिन , गुज़रने वाला था |
मैं बच भी जाता तो , इक रोज़ मरने वाला था ||


ना त-आरूफ़ ना त-अल्लुक हैं , मगर दिल अक्सर |
नाम सुनता हैं , तुम्हारा तो उछल पड़ता हैं ||


अंदर का ज़हर चूम लिया , धुल के आ गए |
कितने शरीफ़ लोग थे , सब खुल के आ गए ||


दो गज सही ये  , मेरी मिलकियत तो हैं |
ऐ मौत तूने मुझे  , ज़मीदार कर दिया ||


मुझसे पहले वो किसी और की थी , मगर कुछ शायराना चाहिए था |
चलो माना ये छोटी बात है , पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिए था ||

 

राहत इंदौरी की मशहूर गजलें Famous Ghazals of Rahat Indori


Rahat Indori Ghazals : 1

” कहीं अकेले में मिल कर झिंझोड़ दूँगा उसे ” , “जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूँगा उसे” |

“मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उस का” , “इरादा मैं ने किया था कि छोड़ दूँगा उसे” |

“बदन चुरा के वो चलता है मुझ से शीशा-बदन” ,”उसे ये डर है कि मैं तोड़ फोड़ दूँगा उसे” |

“पसीने बाँटता फिरता है हर तरफ़ सूरज”,”कभी जो हाथ लगा तो निचोड़ दूँगा उसे” |

“मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को,”समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूँगा उसे |

“हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे,”कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते ” |

| | “मेरे जज़्बे को मिरे साथ ही मर जाना है” | |

Rahat Indori Ghazals : 2


” चलते फिरते हुए महताब दिखाएंगे तुम्हें “, “हमसे मिलना कभी, पंजाब दिखाएंगे तुम्हें” |

“चांद हर छत पर है, सूरज है हर आंगन में”,” नींद से जागो तो कुछ ख्वाब दिखाएंगे तुम्हें” |

“पूछते क्या हो कि रुमाल के पीछे क्या है”,” फिर किसी रोज ये सैलाब दिखाएंगे तुम्हें”||||

Rahat Indori Ghazals : 3


” हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं “, ” मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिन्दुस्तान कहते हैं” |

” जो दुनिया में सुनाई दे उसे कहते हैं खामोशी”, “जो आंखों में दिखाई दे उसे तूफान कहते हैं”||

Rahat Indori Ghazals : 4


“अगर खिलाफ है होने दो जान थोड़ी है” , “ये सब धुँआ है कोई आसमान थोड़ी है “|

“लगे की आग तो आएंगे घर कई जद्मे में” , “यहाँ सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है”|

“हमारे मुह से जो निकले वही सदाकत है” , “हमरे मुह में तुम्ही जबान थोड़ी है” |

“मै जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं है” , “लेकिन हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है”|

“आज शिहिदे मसनद है कल नहीं होंगे” , “किरायेदार है जाती मकान थोड़ी है “|

“सभी का खून सामिल इस मिट्टी में” , “किसे के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है” |

Rahat Indori Ghazals : 5

“मेरे हुजरे में नहीं और कही पर रख दो” , “आसमा लाये हो ले आओ जमी पर रख दो” |

“अब कहा ढूढने जावोगे हमारे कातिल” , “आप तो क़त्ल का इल्जाम हमी पर रख दो” |

“उसने जिस ताख पर कुछ टूटे दिए रखे है”, “चाँद तारो को भी ले जाके वही रख दो” |

“कसती तेरा नसीब चमकदार कर दिया” , “इस पार के थपेड़ो ने उस पार कर दिया”

“अफवा थी कि मेरी तबियत ख़राब है” , “लोगो ने पूछ-पूछ कर बीमार कर दिया” |

“दो गज सही मगर  ये मिलिकियत तो है” , “ऐ मौत तूने मुझे जमीदार कर दिया “|

“सुबह की नई हवाओं कि सोभत बिगाड़ देती है”, “कबूतरों को खुली छत बिगाड़ देती है” |

“जो जुर्म करते है वह इतने बुरे नहीं होते” , “सजा न देके अदालत बिगाड़ देती है” |

“मिलना चाहा है  इंसा को जब भी इंसा से” , “तो सारे काम सियासत बिगाड़ देती है”|

“हमारे पीर तकीमीर ने कहा था कभी” , “मिया ये आशिकी इज्जत बिगाड़ देती है”|

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