बुद्धि ही महान-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 05,2021 06:46 AM posted by Admin

किसी गांव में चार ब्राह्मण रहते थे, एक बार उन्होंने सोचा कि हमें कहीं पर जाकर शास्त्र विद्या पढ़नी चाहिए, जिससे हम भी ज्ञानी पंडित बन जाएं, पहा सोचकर वे चारों कन्नौज शहर की ओर विद्या प्राप्ति के लिए चल पड़े। काफी समय तक वे गुरु जी की सेवा करते हुए शास्त्र विद्या प्राप्त करते जब उन्होंने विद्या प्राप्त कर ली तो अपने घर की ओर जाने लगे। उस बड़ा भयंकर जंगल पड़ता था, वहां पर उन्होंने एक धनी मरा देखा। खरे ग उसे श्मशान भूमि की ओर ले जा रहे थे ।

श्मशान भूमि के बाहर व का देखकर एक ब्राह्मण ने अपनी पस्तक खोलकर देखते हए र आर श्मशान में जो खडा हो वह भाई है। तभी उगने कहा कहा-राज मित्रो यह गधा तो हमारा भाई है। तभी सब के सब उसके गले मिलने लगे इतने में उन्होंने बड़ी तेज़ी से जाता एक ऊंट देखा, तो एक ने कहा—इसके बारे में पुस्तक देखकर बताओ। उसमें लिखा था कि धर्म की गति तेज होती है। जो हमारा गधा है उसे भी तैयार करना चाहिए। तभी उन्होंने मिलकर गधे को ऊंट के गले में बांध दिया । यह बात किसी ने जाकर धोबी से कह दी उस धोबी को गुस्सा आ गया और वह इन मूर्ख पंडितों को मारने के लिए आया। उसे देखते ही मूर्ख पंडित भागने लगे, थोड़ी दूर जाने पर उन्हें एक नदी मिली । उसमें एक बड़ा पत्ता बहता आ रहा था, उसे देखकर एक बोला, देखो यह पत्ता हमें नदी पार कराने के लिए आ रहा है । उसे देखते ही एक पंडित ने उस पत्ते पर छलांग लगा दी। दसरे ने उसके बाल पकडे. जैसे ही वे दोनों को डूबते देखा तो उन्होंने कहा, सारा धन जाता देखिए तो आधा दीजिए बांट. उन्होंने झट से चौथे पंडित का सिर बालों से काट उसने तीसरे को डूबने से बचा लिया. इस प्रकार वे तीन रह गए और साथ वाले गांव में जा पहुंचे।

गांव वालों ने उन्हें अलग-अलग भोजन पर बुलाया, एक के घर में घी और खांड वाली सेवियां परोसी गईं तो उसने श्लोक पढ़ा, “लम्बे सूत वाला आलसी, नष्ट होता है,” इसलिए उसने खाना नहीं खाया। दसरे पंडित के आगे मोटा रोट खाने को रखा गया, उसे श्लोक याद आया, “मोटा और फैला हुआ खाना उम्र कम करता है ।" वह भी उसे छोड़कर आ गया। तीसरे ने भी खाना नहीं खाया। इस प्रकार यह तीनों पंडित श्लोकों के वहम में पड़कर भखे चले आए, लोग उनकी मूर्खता पर हंस रहे थे। यह सुनकर चक्रधर ने कहा-“अजी यह कोई बात नहीं, दुष्टों द्वारा बद्धिमान भी नष्ट कर दिए जाते हैं । देवता जिसकी रक्षा करते हैं उन्हें कोई में नहीं मार सकता, यदि मौत आ ही जाए तो उसे कोई बचा नहीं सकता। में ही तुम्हें इन दो मच्छों की कहानी सुनाता हूं जो सतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि थे। “हां... हां...सुनाओ मित्र ।” “लो सुनो