सदा भलाई करो-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 05,2021 03:49 AM posted by Admin

एक बार एक शहर में एक सेठ रहता था। दुर्भाग्य से उसकी पत्नी की मृत्यु हो गई। पत्नी की मृत्यु के पश्चात् जब वह अपने घर के अकेलेपन से दुःखी हो गया तो उसने बहुत-सा धन देकर किसी वैश्य की लड़की से शादी कर ली। इस प्रकार वह सेठ उस लड़की के साथ बड़े आनन्द से रहने लगा था। एक बार जैसे ही वह दोनों रात्रि के समय पलंग पर लेटे हुए थे कि एक चौर उनके कमरे में घस आया। डर के मारे वह लड़की उस बूढ़े पति से लिपट । सठ को उसके इस प्रकार लिपटने से बड़ा आनन्द आया, उसने सोचा जब से उसकी शादी हई है यह पहली बार ऐसा प्यार कर रही है ।

फिर हा उसने सामने खडे चोर को देखा तो समझ गया कि इस चोर के मुझसे लिपट रही है । आज से पहले तो यह मुझसे घृणा करती थी, डर से यह मुझसे लिपट मुझे अपने पर बोझ मानती थी। लेकिन आज इस चोर ने हमारे घर में आकर मुझे पत्नी का सच्चा प्यार तो दिया । यह चोर तो मेरे लिए देवता है । इसलिए सेठ ने चोर से कहा "भाई, तुझे जो कुछ भी चाहिए ले जा।' “नहीं सेठ जी ! अब आपके पास ऐसी कोई चीज़ नहीं जिसे मैं चुरा सकुँ । हां, यदि कोई चुराने योग्य चीज़ थी तो वह आपकी पत्नी, लेकिन वह तो आपसे ऐसे लिपट गई है, जैसे बहुत प्यार करती हो ।

इसलिए मैं अब फिर कभी आऊंगा।" यह कहकर चोर वहां से चला गया। इससे यह अर्थ निकलता है कि भला करने वाले चोर को भी लोग अच्छा समझते हैं। फिर शरण में आए हए शत्र की तो बात ही क्या है-यह बात ध्यान रखने योग्य है महाराज, शत्रु का शत्रु आपका मित्र बनता है । यह हमारी ताकत बढ़ाएगा और हमें उनके सारे भेद बताएगा।

क्योंकि उन्होंने इसे मार-पीटकर निकाला है। अब इसका कोई ठिकाना नहीं । उल्लू राजा ने दूसरे मंत्री से पूछा, “इसके बारे में तुम्हारा क्या विचार है?" “महाराज, इसे मारना नहीं चाहिए, क्योंकि आपस में लड़ने वाले शत्रु अपने हित में होते हैं। जैसे चोर ने ब्राह्मण की जान छुड़वाई और राक्षस ने दो गायें” “यह कैसे हुआ जरा विस्तार से बताओ मंत्री !” "लो सुनिए महाराज !”