सब्र का फल मीठा-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 05,2021 06:36 AM posted by Admin

एक नगर में चार ब्राह्मण मित्र रहते थे। वे बेचारे बहुत गरीब थे। वह बेचारे हर रोज़ सोचते कि हम क्यों गरीब हैं. हमारे साथ के बहत से लोग अमीर हैं, वे भी हमारे जैसे ही तो इंसान हैं। धनी बनने के चक्कर में वे चारों के चारों अपने घर से निकल कर उज्जैन नगरी में पहुंच गए। वहां पर उन्हें एक तपस्वी साधु मिला, उसके चरणों में प्रणाम कर वे चारों बैठ गए। साधु जी ने उनसे पूछा कि तुम लोग यहां क्या - करने आए हो ? उन चारों ने साध जी के चरणों में गिरकर कहा, “महाराज हम ब्राह्मण पुत्र हैं किन्तु निर्धन होने के कारण बहत दुःखी हैं, इसलिए जैसे भी हो हमें अमीर बनने का रास्ता बताओ।"

उन चारों लड़कों पर साधु जी को दया आ गई, तभी उन्होंने इन्हें चार बत्तियां देकर कहा कि इन्हें ले जाकर तुम ऊंचे पहाड़ पर चढ़ जाओ, फिर इन्हें एक-एक करके फैंकना, जहां पर भी बत्ती गिरेगी वहीं पर तुम्हें खजाना मिलेगा। जैसे ही वे पहाड़ पर चढ़े उनमें से एक ने अपनी बत्ती फैंकी, जहां पर वह बत्ती गिरी तो उस स्थान को खोदने पर बहुत-सा तांबा निकला, उस तांबे को देखकर तीनों बोले यह तो बेकार है, इससे हम अमीर नहीं बन सकते, चलो और आगे चलते हैं, लेकिन चौथे मित्र ने उनकी बात न मानते हुए कहा, नहीं, मेरे लिए तो यही काफी है अब मैं और आगे नहीं जाऊंगा। उसे वहीं पर छोड़कर वे तीनों आगे चले गए।

कुछ आगे गए तो दूसरे वाले ने अपनी बत्ती फैंकी, उस स्थान को खोदने से चांदी मिल गई, उसने खुशी से कहा, “भाई लोगो, अब हमें और आगे जाने की ज़रूरत नहीं, इससे हम अमीर बन जाएंगे।" उसकी बातसुन उन दोनों ने कहा, भाई देख पहले तांबा मिला, फिर चांदी अब यदि आगे जाएंगे तो सोना मिलेगा। इसलिए हम दोनों आगे जाते हैं। यह कहकर वे दोनों और आगे बढ़ गए। जैसे ही वे आगे गए तो तीसरे ने अपनी बत्ती फैंकी, उस स्थान को खोदने पर सोना मिल गया, वह सोने को पाकर अपने साथी से बोला, भाई अब और आगे जाने की ज़रूरत नहीं, अब तो हमें सोना मिल गया है, लेकिन चौथा साथी बोला, भाई हो सकता है आगे हमें हीरे मिल जाएं, पहले तांबा, फिर चांदी फिर सोना, अब तो हीरे मिलेंगे... हीरे-मैं तो अब हीरे लेने जा रहा हूं।

तुम बेशक यहीं पर रहो। यह कहकर वह आगे बढ़ता गया। दूर पहाड़ी पर चढ़ उसने एक ऐसे प्राणी के देखा जिसके सिर पर एक चक्र घूम रहा था और वह बेचारा खून से लथपथ खड़ा था। उसे देखकर वह उस व्यक्ति के पास जाकर बोला"भाई यह क्या है ? तुम्हें क्या हो गया अभी वह बोल ही रहा था कि एक चक्र उसके सिर पर से हटकर उस लड़के के सिर पर आ गया वह डर और पीड़ा के मारे तड़पते हुए कहने लगा- “यह क्या हो गया भाई।" तब वह आदमी बोला, “भाई इस खूनी पहाड़ी पर मैं भी धन के लोभ में ऐसी ही बत्ती लेकर आया था। मेरे आने से पहले यह किसी और व्यक्ति को जकड़े बैठा था मैंने उसके पास जाकर अपनी लोभ की कहानी सुनाई तो यह मुझे पकड़ कर बैठ गया अब तुम....” - इसी बीच उसके तीनों साथी उसे ढूंढते आए तो उसे इस प्रकार जकड़े देखकर हैरान रह गए और उसे कहने लगे, “तू लोभ में आकर ही तो फंसा है, लोभ ही सब दुःखों की जड़ है । ठीक ही कहा है-बुद्धि उत्तम है, विद्या नहीं, क्योंकि बुद्धिहीन ऐसे नष्ट हो जाते हैं जैसे शेर बनाने वाले।“वह कैसे ?” “मैं तुम्हें उसकी कहानी सुनाता हूं।”