परिणाम को पहले सोचो-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 03,2021 08:37 AM posted by Admin

एक जंगल में एक पुराने वृक्ष के नीचे बहुत सारे बगुले रहते थे, उस वृक्ष की जड़ में एक काला सांप रहता था। यह सांप बगुले के बच्चों को सदा ही खा जाता था। इसी दुःख के मारे एक बगुला तालाब के किनारे आंखें नीचे किए बैठा रो रहा था, उसे रोते देखकर एक केकड़े ने पूछा “मामा ! क्या बात है आप रो क्यों रहे हैं ?"

“भांजे, मेरे बच्चों को वृक्ष के नीचे रहने वाला सांप आकर खा जाता है। उससे बचने का कोई उपाय बताओ।" सकडे ने सोचा, यह बगुला हमारी जाति का दुश्मन है, इसलिए इसको ऐसा उपाय बताऊं कि यह भी परिवार सहित नष्ट हो जाए। यही सोचकर केकड़े ने उस बगुले से कहा “देखो मामा, तुम मछली के मांस के टुकड़े सांप के बिल से लेकर. नेवले के बिल तक रख आओ, इस तरह नेवला सांप के बिल तक पहुँच जाएगा और सांप को खा जाएगा। बस तुम्हारा शत्रु अपने-आप मर जाएगा।"

बगुला केकड़े की बात सुनकर खुशी-खुशी घर लौटा। उसने आते ही वही किया जो केकड़े ने कहा था। नेवला मछली के मांस को सूंघता हुआ सांप के बिल तक पहुंच गया और वहां पहुंचकर सांप को खा गया। किन्तु उसके साथ ही वह वृक्ष पर चढ़कर उन बगुलों को भी खा गया जो वहां पर बैठे थे। । इस प्रकार बगुले स्वयं भी मर गये, उस बगुले ने पाप की बात तो सोच ली पर उसके परिणाम की गहराई को नहीं समझा। इस प्रकार पापबुद्धि ने चोरी की बात तो सोच ली उसके परिणाम के बारे में नहीं सोचा। उसका परिणाम यही हुआ कि उसके पिता की मृत्यु हो गई। जज ने धर्मबुद्धि को समझाते हुए कहा।करटक ने कहा, “जहां पर वजनी लोहे के तराजू को चूहे खा जाते हों, वहां यदि चालाक बाज बालक को ले जाएं तो क्या सन्देह ?” “यह कैसे ?” लो सुनो