लालची बेटा-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 05,2021 02:17 AM posted by Admin

एक नगर में हरि नामक एक ब्राह्मण रहता था। वह खेती तो करता था किन्तु उसे उसका मनचाहा फल नहीं मिलता था। एक दिन गर्मी के दिनों में धप से व्याकुल हरि अपने खेतों के बीच में एक वृक्ष के नीचे लेटा हुआ था। पास ही फण फैलाए एक सांप को देखकर वह सोचने लगा कि आज तक मैंने इस नाग देवता की पूजा नहीं की तभी तो मुझे अपनी मेहनत का फल नहीं मिलता इसलिए आज मैं इस नाग देवता की पूजा करूंगा।

यह सोचकर वह कहीं से दूध मांग लाया और एक बर्तन में डालकर उसे सांप के सामने ले जाकर बोला “हे नाग देवता ! मुझे यह नहीं पता था कि आप यहां रहते हैं, तभी मैं पूजा नहीं कर पाया, इसलिए मुझे क्षमा करें ।" यह कहकर उसने उस दूध को वहीं रखा और स्वयं घर चला गया। सुबह उठकर जब हरि नाग देवता वाले स्थान पर आया तथा दूध वाले बर्तन को देखा तो उसके अन्दर सोने का एक सिक्का पड़ा था। वह बहुत खुश हुआ यह धन पाकर। 

अब तो हरि रोज़ ही उस नाग देवता के लिए दूध लाकर रखता और इसके बदले में सुबह ही सोने का एक सिक्का मिल जाता । एक दिन हरि को कहीं बाहर जाना था। उसने सांप के लिए दूध ले जाने के लिए अपने लड़के से कह दिया । बेटा भी वहां पर दूध रख कर जैसे ही सुबह वहां गया तो उसे सोने का सिक्का मिला।

उस लड़के ने सोचा इस सांप के पास तो बहुत से सोने के सिक्के होंगे। मैं क्यों न इसे जान से मारकर सारे सिक्के के सारे निकाल लूं।  यही सोचकर उसने सांप के सिर पर लाठी दे मारी । किन्तु सांप बड़ा होशियार था, वह लाठी की चोट बचा गया साथ ही उसने उस लड़के को डस लिया, जिससे वह लड़का वहीं पर मर गया। दूसरे दिन हरि वापस आया तो उसने अपने आदमियों से अपने बेटे की मत्य की खबर सनी। उसने कहा, “जो प्राणी अपने शरण में आए पर दया नहीं करता वह इसी तरह भ्रष्ट हो जाता है।" लोगों ने पूछा, “यह कैसे ?” लो सुनो वह कहानी