कुछ करने से पहले सोचो-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 05,2021 06:21 AM posted by Admin

किसी गांव में देव शंकर नाम का एक पंडित रहता था, उसके यहां एक बार एक पुत्र ने जन्म लिया, ठीक उसी औरत के साथ ही नेवले ने भी एक बच्चे को जन्म दिया लेकिन वह बेचारी बच्चे को जन्म देते ही मर गई। इस प्रकार वह नेवले का बच्चा भी उसी घर में रहने लगा, किन्तु ब्राह्मणी सदा उस नेवले के बच्चे से अपने को बचाकर रखती थी। उसे डर था कि कहीं यह नेवले का बच्चा मेरे बच्चे को डस न ले ?एक बार पंडित जी को यह पता चला कि कोई साधु इस गांव में आया है जो निर्धनों को धन देता है । जब वह जाने के लिए तैयार हुआ तो उसकी पत्नी कुएं पर पानी लेने गई थी, उसने अपने बच्चे की रक्षा के लिए उस नेवले के बच्चे को बैठा दिया और धन लेने चला गया।

इसी बीच बिल में से एक काला सांप निकला, नेवले ने जैसे ही अपने शत्रु को देखा तो उसे यह डर पैदा हो गया कि यह पापी मेरे भाई को डस लेगा। उस सांप को अपनी ओर आता देख नेवले ने उस पर हमला कर दिया। बस दोनों में खब खलकर यद्ध होने लगा। अन्त में नेवले ने सांप को काट-काटकर उसे बुरी तरह घायल करके मार डाला।जैसे ही ब्राह्मणी पानी का मटका लेकर आई तो उसने सबसे पहले नेवले के मुंह को देखा तो खून से लथपथ था । वह उसके मुंह पर खून लगा देख समझ बैठी कि इसने ज़रूर मेरे बेटे का खून पिया है।बस फिर क्या था उस क्रोध से भरी औरत ने पानी मटका ही उस नेवले पर दे मारा । नेवला बेचारा उसी समय धरती पर तड़पने लगा, कछ क्षणों में वह मर गया।

जैसे ही वह औरत अन्दर गई तो उसने देखा उसका बेटा तो आराम की नींद सो रहा है और काला सांप वहां पर मरा पड़ा है। अपनी भूल का पता चला तो वह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी और छाती पीटने लगी।इसी बीच पंडित भी धन लेकर आ गया, उसे देखते ही वह औरत बोली, “यह सारा पाप आपके कारण हुआ है। आप धन के लोभ में अंधे होकर न लड़के को छोड़कर जाते, न ही यह नेवला मरता।”ऐसे ही एक लोभी की कहानी और सुनो। “हां ज़रूर।"