ख्याली पुलाव-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 05,2021 07:22 AM posted by Admin

एक गांव में एक पंडित रहता था। दान का आटा लेकर धीरे-धीरे उसने एक बड़ा मटका भर लिया। वह उस मटके की ओर हर सुबह उठकर सोचता और कहता यदि कभी अकाल पड़ जाए तो इससे थोड़ा धन तो कमाया जा सकता है। इस आटे के पैसे से मैं दो बकरियां खरीदूंगा, जब बकरियों के बच्चे हो जाएंगे तो उन सबको बेचकर एक गाय खरीद लूंगा।

गाय के बच्चे होने पर मैं उसे बेचकर भैंस खरीदूंगा, भैंसे बेचकर घोड़ी। फिर घोड़ियों के कई बच्चे हो जाएंगे, उन घोड़े-घोड़ियों को बेचकर मैं एक बड़ा-सा मकान बनाऊँगा, तब मेरी शादी होगी, फिर मेरा एक बेटा होगा जिसका नाम मैं सोम शर्मा रखंगा वह लड़का शरारतें करेगा, किसी दिन वह घुटनों के बल चलता हुआ घोड़ों के पास से मेरे पास आएगा, मैं अपनी पत्नी से कहूंगा कि बालक को पकड़ो, यह घोड़ों के पास जा रहा है, लेकिन पत्नी बेचारी तो उस समय खाना बना रही होगी।

इतने में वह बालक बिल्कुल घोड़ों के पांव के पास पहुंच जाएगा, ऐसे में मुझे ही अपनी चारपाई से उठकर भागना होगा, मैं अपने पुत्र को बचाने के लिए उसे ज़ोर से टांग मारूंगा। बस फिर क्या था पंडित जी ने वास्तव में ही ज़ोर से अपनी टांग जो घुमाइ और उस मटके पर दे मारी । बस देखते-देखते मटका टूट गया और सारा आटा धरती पर बिखर गया, कल्पना का संसार हवा में उड़ गया, इसलिए मैं कहता हूँ न आई हई बात की चिन्ता और न होने वाली बात मत सोचो। इसीलिए कहा है कि जो लोभ में फंसकर काम करता है और उसके फल को नहीं सोचता वह राजा चन्द्र के समान कष्ट पाता है।"वह कैसे ?" "लो मैं तम्हें राजा चन्द्र की कहानी सुनाता हं