कायर राक्षस-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 06,2021 01:44 AM posted by Admin

कश्मीर के राजा रामनाथ की लड़की के महल में एक राक्षस रोजाना ही आकर उसे तंग किया करता था। लड़की उस राक्षस से बहुत दुखी थी किन्तु उस राक्षस से पीछा छुड़ाने का कोई रास्ता उसकी समझ में नहीं आ रहा था। एक बार एक और राक्षस उस लड़की के कमरे में घुस गया और एक कोने में छिपकर खड़ा हो गया। उसी समय दासी से राजकुमारी से बातें कर रही थी कि किस तरह में इस राक्षस से पीछा छुड़ाऊं।
उस राक्षस ने जैसे ही उनके मुंह से यह बात सुनी तो समझ गया कि वहां पर कोई अन्य राक्षस भी आता है। मैं क्यों न छिपकर उसे देखू कि वह कौन हैं? यह सोचकर वह घोड़े का रूप धारण कर उन घोड़ों के बीच में छिपकर खड़ा हो उस राक्षस की प्रतीक्षा करने लगा। इसी बीच एक घोड़ा चोर उन घोड़ों के अस्तबल में आ घुसा।

उसने इस राक्षस रूपी मोटे-ताजे घोड़े को देखा तो बहुत खुश हो उस पर सवारी करके ले उड़ा। राक्षस ने समझा यह तो वही राक्षस होगा जो मेरी पीठ पर सवार हो गय है। यही सोचकर राक्षस तेज दौड़ने लगा। वह इतना तेज भागा कि चोर बेचार डर गया कि कहीं मैं ही किसी राक्षस रूपी घोड़े पर तो नहीं बैठ गया। इस तर वह चोर एक वृक्ष के नीचे से गुजरते हुए उस वृक्ष की टहनियों को पकड़कर उ पर चढ़ गया। तभी दोनों ने ही समझा कि अब तो जान बची। वह राक्षस तेज दौड़ा जा रहा था तो उस हाथ तो उसका एक मित्र बदर मिला जिसने उस इस तरह डरा र कहा- “वाह भाई! तुम उस आदमी से हार गए जो तम्हारा जि यो जाकर उसे खा लो। चलों में तुम्हारे साथ चलता है।" जैसे ही बंदर और राक्षस उस पेड़ पर पहुंचे तो चोर ने बंदर की दम इतने जोर से दबाई कि बंदर चीखे मारता हुआ कहने लगा- "चलो स्तव में ही कोई भयंकर राक्षस है। इस प्रकार वे दोनों वहां से भाग खडे हुए और उसक हाथ पकड़कर इतने जोर से टन हुए।, इसलिए भाई मुझे जाने दो। अब तुम अपने लोभ और अहंकार से रावण भी मारा गया। अंधा, कुबड़ा और तीन स्तनों वाली राजकन्या, ये तीनों अन्याय से पूर्व जन्म के अनुसार ठीक हो गए। यह कहानी सुनो