गीदड़ का बच्चा गीदड़-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 05,2021 05:18 AM posted by Admin

किसी जंगल में शेर का जोड़ा रहता था। शेरनी ने दो बच्चे पैदा किए और दोनों पति-पत्नी मिलकर उन बच्चों को पालने लगे। एक दिन शाम को जैसे ही शेर शिकार से खाली लौट रहा था। उसे रास्ते में गीदड का बच्चा मिला, जिसे उसने मारने की बजाए अपनी पीठ पर बैठाकर ले आया। आते ही शेरनी ने पूछा, “क्या आज मेरे लिए भोजन नहीं लाए ?" “नहीं प्रिया ! आज तो मुझे यह गीदड़ का बच्चा मिला है, मैंने इसे जान बूझकर नहीं मारा ।

मेरा विचार है तुम इसे अपने बच्चों के साथ ही पाल लो।" शेरनी ने अपने पति की बात मान ली और उस गीदड़ के बच्चे को भी अपने बच्चों के साथ मिलाकर अपना दूध पिलाकर पालने लगी। इस प्रकार यह तीनों बच्चे एक साथ इकट्ठे रहने लगे इनमें जाति भेद की कोई बात नहीं थी। एक दिन उस जंगल में घूमता हुआ हाथी आ गया। हाथी को देखकर शेर के दोनों बेटे उस हाथी की ओर हमला करने के लिए बढ़े तो झट से गीदड़ पुत्र शेर बच्चे ने उनसे कहा “अरे, यह तो तुम्हारा शत्रु है । इसके आगे मत जाओ, चलो घर भाग चलें।

उस गीदड बच्चे की बात सन उन दोनों का दिल भी ट गया और उसे भागा देख वे दोनों भी घर की ओर भाग चले । एक गीदड़ ने दो शेरों को भी गीदड़ बना दिया। इसीलिए राजा लोग अपनी सेना में खानदानी वीर चाहते हैं, घटिया वंश कलोगों को नहीं । सेना में केवल राजपूतों को ही स्थान मिलता है, तुम्हें शायद पता नहीं कि जैसे ही घर पहंचकर शेर के बच्चे ने उस गीदड़ के बच्चे से क्रोध कहा कि भाई तुम हाथी को देखकर क्यों भागे थे। तुमने तो आज हमारी जाति के माथे पर कलंक का टीका लगाया है।

हम तुम्हें मार कर ही छोड़ेंगे, बुजदिल शेर को जीने का कोई अधिकार नहीं। - यह कहते हुए जैसे ही शेर के बच्चे उस अपने भाई को मारने के लिए दौड़े तो उस बेचारे को तो पसीना आ गया, मौत को सामने देख वह कांपने लगा। शेरनी ने देखा, यह तो आपस में ही लड़ने-मरने को तैयार हो गए हैं तो उसने बीच में आकर कहा "बेटा नहीं, इसे मारो मत, यह दोष तो इसका नहीं है, यह तो सारा दोष इसकी जाति का है।

वास्तव में यह शेर पुत्र नहीं, यह तो गीदड़ पुत्र है जो बचपन में हमें जंगल में पड़ा मिला था, मैंने इसे पाला-पोसा है, मैं सोचती थी शायद यह बड़ा होकर तुम्हारा साथी बन जाएगा लेकिन नहीं ऐसा नहीं हो सका, इसलिए गीदड़ पुत्र तुम यहां से जल्दी भाग कर अपनी बिरादरी में शामिल हो जाओ, इसी से तुम बच सकते हो।"गीदड़ पुत्र शेर भाग गया, अब तुम्हारे लिए यही आदेश है कि यहां से भाग जाओ, नहीं तो राजपूत तुम्हें मार डालेंगे।” इस प्रकार कुम्हार वहां से भाग खड़ा हुआ। अरे पागल तुम पर लानत है, जो तूने स्त्री के लिए ऐसा नीच काम करना चाहा, स्त्री पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। “वह क्यों ?" "तुमने पंडित एवं उसकी पत्नि की कहानी नहीं सुनी, जिसने अपने पति को मार कर एक लंगड़े से शादी कर ली थी।" "नहीं तो।"लो उस कहानी को सुनो