ढोल की पोल-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 06,2021 01:25 AM posted by Admin

एक बार एक गीदड़ उस जंगल में चला गया जहां दो सेनाए युद्ध कर रही थीं। दोनों सेनाओं के बीच के क्षेत्र में एक ऊंचे स्थान पर नगाड़ा रखाच गीदड़ ने उस नगाड़े को देखा। वह गीदड़ बेचारा कई दिनों से भूखा थाका ऊंच स्थान पर रखे देखकर वह कुछ देर के लिए रूका। देखते ही देखते हवा  के एक झोके से नगाड़ा नीचे गिर गया। फिर आस-पास के वृक्षों से लटकी टहनियां हवा से उस नगाड़े पर पड़ने लगी तो उसमें से आवाजें आने लगी इन आवाजों को सुनकर डर गया। सोचने लगा कि अब क्या या मझे यहां से भागना होगा? नहीं नहीं। मैं अपने पूर्वजों के इस को छोडकर नहीं जा सकता। भागने से पहले मुझे इस आवाज का रहस्य जानना होगा। यही सोचकर वर धीरे-धीरे उस नगाड़े के पास पहुंच गया। देर तक उसे देखने के बाद वह सोचने लगा कि यह तो नगाड़ा तो बहुत बड़ा है. इसका पेट भी बहुत बड़ा है, इसको चीरने से तो बहुत चर्बी और माल खाने को मिलेगा। भखा गीदड इसके अतिरिक्त और सोच भी क्या सकता था। बस. यही सोचकर गीदड़ ने नगाड़े का चमड़ा फाड़ दिया और घुस गया उसके अन्दर। नगाड़े को फाड़ने में तो उसके दांत भी टूट गए थे किन्तु मिला कल भी नहीं। वह स्वयं से कहने लगा-केवल आवाज से नहीं डरना चाहिए।

इंसान को बुजदिल भी नहीं बनना चाहिए।' शेर ने दमनक की और देखकर कहा। “देखो मित्र मेरे सारे साथी इस समय बहुत डरे हुए हैं, ये सब के सब जंगल छोड़ना चाहते हैं। बताओं मैं अकेला क्या करूं? यह इनका दोप नहीं महाराज, वाणी नर और नारी यह सब पुरुष विशेष को पाकर योग्य और अयोग्य होते हैं। आपके घबराने से यह भी घबरा गए है।। अतः आप तब तक यहीं रहें जब तक मैं पूरी सच्चाई का पता लगाकर वापस न आऊं। “क्या आप वहां जाने का इरादा रखते हो?" “जी महाराज, अच्छे और वफादार सेवक का जो कर्त्तव्य है मैं उसे पूरा करूंगा। बड़े लोग यह कह गए हैं कि अपने मालिक का कहना मानने में कभी भी झिझक नहीं लेनी चाहिए, चाहे उसे सांप के मुंह में या सागर की गहराई में ही क्यों न जाना पड़े।” पिंगलक, दमनक की बातों से बहुत खुश हुआ। उसने उसकी पीठ पर थपथपाते हुए कहा- “यदि यही बात है तो जाओ, भगवान तुम्हें इस काम में सफलता दें।" धन्यवाद ! मेरे मालिक, भगवान ने चाहा तो मैं सफलता पाकर ही लौटूंगा। इतना कहकर दमनक वहां से उठकर उस ओर चल दिया जहां उस बैल की आवाज सुनी थी।

दमनक के चले जाने के पश्चात् शेर सोचने लगा कि मैंने यह अच्छा नहीं किया जो उसे अपने सारे भेद बता दिये। कहीं यह शत्रु का जासूस न हो, या दोनों पक्षों को पागल बनाकर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहा हो। है कि मुझसे पुराना बदला चुकाना चाहता हो, क्योंकि मैंने पद से हटाया था । कहा गया है__जो लाग राजा के यहां से ऊंचे पद पर होते हुए बड़ी इज्जत मान रखते है, यदि उन्हें पद से हटा दिया जाए तो वे अच्छे होते हए भी उस राजा के सत्रु बन जाते है। वे अपने अपमान का बदला लेना चाहते हैं। इसलिए मैं उस दमनक को परखने के लिए यहां से जाकर दूसरे स्थान पर चला जाता हूँ , यह भी हो सकता है कि दमनक उसके साथ मिलकर मुझे मरवा ही डाले। यही सब सोचकर पिगंलक किसी दूसरे स्थान पर बैठ गया।