धोखेबाज का अन्त-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 05,2021 05:23 AM posted by Admin

सच्चे दिल से की हुई प्रार्थना स्वीकार हो गई । उसी समय उसकी पत्नी जीवित हो गई। गिर दोनों ने मिलकर पानी पिया कुछ जंगली फल खाए, इसके पश्चात् चल पड़े। थोड़ी दूर जाने के पश्चात् वे एक बहुत बड़े बाग में जाकर विश्राम करने लगे। फिर पत्नी ने कहा-“मुझे बड़े ज़ोर की भूख लग रही है।

अपनी पत्नी की बात सुन पंडित उसी समय भोजन लेने के लिए चल पड़ा। पंडित के जाने के पश्चात वहां पर एक लंगड़ा गायक आया उसकी आवाज़ में इतना जादू था कि पंडिताइन उसे सुनते ही दिल दे बैठी और उसके पास जाकर कहने लगी “गायक जी ! आपकी आवाज़ में तो कमाल का जाद है। आपने मेरा मन जीत लिया है। अब तो तुम मेरे तन को भी अपनी बांहों में लेकर मुझे जीवन का सच्चा आनन्द दो, यही मेरी इच्छा है, इसे तुम्हें अवश्य पूरा करना होगा।" लंगड़ा गायक उस औरत की बातों में फंस गया । प्रेम जाल से आज तक कौन बच पाया है ? बस दोनों ने खूब आनन्द लिया।

इसके पश्चात् स्त्री ने कहा-“हे गायक ! अब आप भी हमारे साथ ही चलोगे।" इसी बीच पंडित भी भोजन लेकर आ गया था। जैसे ही पति-पत्नी भोजन करने लगे तो पत्नी ने कहा-देखो जी ! यह अच्छा गायक है इसका इस दुनिया में कोई नहीं । क्यों न हम इसे भी अपने साथ रख लें। क्योंकि जब आप मुझे छोड़कर चले जाते हो तो मेरा दिल अकेलेपन से बहुत घबराता है। पंडित पहले से ही उसका गुलाम था । उसने झट से हां कर दी। इस प्रकार वे तीनों वहां से चल पड़े। अब पंडित की पत्नी दिन-प्रतिदिन उस लंगड़े गायक की ओर खिंचती जा रही थी। यहां तक कि उन्हें यह पंडित अपने रास्ते में रोड़ा महसूस होने लगा। एक दिन दोनों ने एक षड्यन्त्र रचा । प्रेम और वासना की आग में अन्धे हो उन्होंने कुएं के पास सोए पंडित को कुएं में फेंक कर अपना रास्ता साफ कर लिया।

अब यह चालाक औरत लंगड़े गायक को अपनी पीठ पर उठाए जैसे ही किसी दूसरे देश में पहुंची तो वहां के पहरेदारों ने उसे सन्देह की दृष्टि से देखते हए पकड़कर अपने राजा के सामने पेश किया। राजा ने उस औरत से पूछा- “यह लंगड़ा कौन है "यह मेरा पति है महाराज ! क्योंकि यह बेचारा लंगड़ा है चल, फिर नहीं सकता, इसके कारण हमसे लोग घृणा करते थे। मैंने इसी दःख के मारे अपना देश छोड़ दिया और आपके पास शरण लेने आई हूं। राजा उस औरत की बात सुनकर समझ गया कि यह बेचारी बहुत दुःखी है, तभी झट से बोले-"आओ मैं तुम्हें रहने के लिए ही गांव इनाम में देता हं । उनकी कमाई से तुम दोनों मौज मारो फिर दोनों वहां रहने लगे।”

उधर किसी साधू ने पंडित को कुएं में से निकाल दिया और वह भी उसी देश के उसी गांव में पहुंच गया था। एक दिन उस स्त्री ने अपने पति को देख लिया। डर के मारे उसका बुरा हाल था। लेकिन उसने एक नई चाल चली। वह राजा के पास जाकर बोली- “महाराज ! यह पापी मेरे पीछे लगा है। शायद यह मेरी हत्या करना चाहता है।"राजा ने उसी समय उसे बुलाया और औरत के कहने पर फांसी की सजा दे दी। लेकिन फांसी देने से पूर्व उसने इस पंडित की अन्तिम इच्छा क्या है, पूछी।

तभी उस पंडित ने उस पापिन पत्नी की और गौर से देखते हुए कहा “देखो महाराज ! यह औरत किसी समय मेरी पत्नी थी। आज यही मेरी शत्रु बन गई है।”राजा ने आश्चर्य से पंडित की ओर देखा । जैसे उसकी बात पर विश्वास न आ रहा हो । इसलिए उसने कहा “हे पंडित ! तुम कोई सबूत दे सकते हो " बाला-“महाराज ! इसका सबसे बड़ा सबूत यही है कि चतुर पान का नाम लेकर यह कह दे कि मैंने अपने पति का लिया हआ नारी, भगवान का नाम लेक आधा जीवन वापस किया।"

सभी लोग इस विचित्र बात को सुन हैरान से उन दोनों की ओर देख रहे थे। राजा ने उस औरत को ऐसा करने का आदेश दिया। राजा के आदेश का पालन न करना मौत थी। बस वह औरत डर कर कहने लगी-“मैंने अपने पति का लिया आधा जीवन वापिस कर दिया।" इतना कहते ही वह पापिन औरत मर गई।

राजा ने आश्चर्य से पंडित की ओर देखकर कहायह क्या बात है ? "फिर पंडित ने उस राजा को बेवफा औरत की सारी कहानी सुना डाली।" बन्दर ने मगरमच्छ से कहा- इसलिए मैं कहता हूं कि कभी स्त्री जाति पर विश्वास न करो । जिस मेले में घोड़ा न होने पर भी लोग हिनहिनाने लगे उसी मेले में मैंने अपना सिर मुंडवाया है। “यह क्यों ?" “लो सुन लो उसकी कहानी