बेवक्त के गीत-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 05,2021 07:16 AM posted by Admin

एक बार एक गधा भूखा-प्यासा इधर-उधर घूम रहा था । एक दिन उसकी मित्रता एक गीदड़ से हो गई । एक रात वह गीदड़ के साथ रहकर वह गधा खूब मजे मारता, इस प्रकार वह दिन-रात मोटा होने लगा।में गया त एक रात वह गीदड़ के साथ खरबूजे के खेतों में खूब माल खा रहा था, आरम्भव खाते-खाते गधे ने कहा, “मामा, क्या मैं तुम्हें राग सुनाऊं मुझे बहुत अच्छा “अरे राग आता है।" गीदड़ बोला, “ओ भांजे,हम यहां चोरी करने आए हैं, यह राग गाने का समय नहीं है ।

कहा भी है कि खांसी वाले आदमी को चोरी नहीं बनवाना है करनी चाहिए । रोगी को जबान का स्वाद छोड़ देना चाहिए, तुम्हारा गाना सुन “वाह कर खेत के रखवाले हमें पकड़ लेंगे या फिर आकर मारेंगे।" वरदान मां गधा ज़िद्द करने लगा तथा बोला “मामा ! तुम जंगली होकर गीत का आनन्द नहीं जानते । विद्या तो एक आता है।' कला है जिस पर देवी-देवता भी मोहित हो जाते हैं।" गीदड़ ने समझाया, “ओ भांजे तुम तो गाना नहीं जानते खाली रेंकते हो। एक नाई मि बेताल बेस्वर ।” कहा, भैया गधा गुस्से से बोला, “मामा क्या मैं गाना नहीं जानता, अरे सात स्वर, | जाए और तीन ग्राम, इक्कीस मूर्च्छन, उन्चास ताल, नव रस, छत्तीस राग, चालीस भाव यह कुल गाने के भेद प्राचीनकाल में भरत मुनि के वेद के सार रूप कहे !पत्नी से भी हैं। मैं अनजान हूं।"

“अच्छा भांजे ! अब मैं खेत के बाहर जाकर खेत के रखवाले वरं दे बालक रहते हूं अब तुम खूब खुलकर गाना । इतना कह गीदड़ चला गया, गधारमा अलापने लगा । गधे की आवाज़ सुन खेत का रक्षक भाग आया, उसने माग पत्नी से पल से गधे की खूब पिटाई की, वह गिर गया.फिर संभलकर वहां से भाग हुआ।” 'गधे को भागते देख गीदड़ बोला, “क्यों भांजे ! आया मजा बेवक्त गाने का “सो आप भी मेरे कहने पर नहीं माने मित्र !" उसकी बात सुन पंडित बोला, जो मित्र की बात नहीं मानता वह मंथर जुलाहे की भांति मृत्यु को प्राप्त होता है। दूसरा मित्र बोला, “वह कैसे ?" "सुनो मेरे भाई उस कहानी को।”