बेमतलब का काम मत करो-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 06,2021 01:10 AM posted by Admin

एक नगर के समीप किसी व्यापारी का मकान बन रहा था। वहां पर लकड़ी का काम करने वाले कारीगर एक लट्ठा चीर रहे थे। लट्ठा आधा तो कटा था कि दोपहर के भोजन का समय हो गया। बढ़ई आधे चीरे लठे में कील फंसाकर भोजन करने चले गए।तभी वहां से बंदरों का एक झूड गुजर रहा था। उसमें से एक बंदर बहुत शरारती था, वह लठे के हिलाने लगा। चिरे हा भाग की वह लटठे के बीच फंसे कील को पकड़ कर जोर-जोर से चिरे हारा भाग की तरफ बठन के कारण उसकी पूंछ दोनों हिस्सों में थी। जोर-जोर से कील हिलाने के कारण कील निकल गई और लटटे हिस्से आपस में जुड़ गए जिसक बाच उसका पूछ दब गई। अब वंदर जोर जीवा मगर अब क्या हो सकता था। बस बंदर तड़प-तड़प कर वहीं मर गया |