बड़ों के नाम से लाभ-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 04,2021 08:07 AM posted by Admin

किसी वन में हाथियों का राजा रहता था। वहां पर एक बार बहुत वर्षों तक वर्षा न हुई, जिसके कारण उस क्षेत्र के सभी तालाब और कुएं सूख गए। तब सब हाथियों ने मिलकर अपने राजा से कहा कि प्यास के मारे हमारे बच्चे मर रहे हैं और कुछ एक तो मर भी गए हैं। कोई तालाब ढूंढिये जिससे पानी पोकर जान बचे। तब बहुत देर सोचने के पश्चात् उसने कहा कि दर एक जगल में पुराने ज़माने का एक बहुत बड़ा तालाब है, शायद उस तालाब में पानी मिल जाए । वह पाताल गंगा के जल के सदा भरा रहता है। चलो वहीं चलते हैं।

इस प्रकार सबके सब हाथी वहां से चल पड़े और पांच रातें, पांच दिन चलते-चलते वहां पर पहुंचे । उस तालाब में आनन्दपूर्वक वे सारा दिन नहाते रहे फिर बाहर निकले । उस तालाब के चारों ओर खरगोशों के अनेक बिल थे। उन हाथियों के भारी पांव पड़ने से वे सारे के सारे दब गए जिससे बहुत से खरगोश मारे गए और बहुतों के शरीर की हड्डियां टूट गईं। उन हाथियों के जाने के पश्चात् खरगोश इकट्ठे होकर सोचने लगे कि हम तो मारे गए। यह हाथी तो हर रोज़ यहां आएंगे क्योंकि बाहर कहीं भी पानी नहीं है। इस प्रकार हमारा सर्वनाश हो जाएगा। कहा भी है सूंघते ही सांप समाप्त करता है, राजा हंसते-हंसते जान लेता है, दुष्टजन इज्जत करते-करते जान लेते हैं। इसलिए हमें कुछ सोचना चाहिए।

तब एक खरगोश ने कहा-“इस स्थान को छोड़कर किसी दूसरे स्थान पर चले जाना चाहिए। मनु और व्यास जी ने कहा है कि-कुल के लिए एक को, देश के लिए ग्राम को और अपने लिए पृथ्वी को भी छोड़ देना
चाहिए। आपत्तिकाल के लिए धन की रक्षा करें । धन देकर स्त्री की रक्षा करें और धन और स्त्री देकर आत्म-रक्षा करें।" तब कुछ साथी बोले-“भाई ! बाप-दादा की धरती को ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता। अब तो इन हाथियों के लिए कोई ऐसा डर पैदा करें जिससे वे यहां पर न आएं। कहा गया है बिना जहर के सांप को फन तो फुफकारना चाहिए। जहर हो या न हो, फुफकार से ही आदमी को डर लगता है।"फिर एक खरगोश बोला-"एक डराने वाली बात है जिससे वे हाथी नहीं आएंगे । वह चाल है कि हाथियों के राजा के पास एक दूत भेजो जो उससे जाकर कहे कि चांद देवता उन्हें इस तालाब में आने से रोकते हैं।
क्योंकि हमारा परिवार इसके चारों ओर बसता है। ऐसा करने से शायद वे लोग मान जाएं।”

तब दूसरे लोगों ने कहा-“यदि ऐसी बात है तो लम्बकर्ण नाम का खरगोश जो बात करने में बड़ा होशियार दूत है उसे वहां भेजा जाए।” सब लोगों ने यह बात मान ली और लम्बकरण को दूत बनाकर हाथी राजा के पास भेजा गया। वहां जाकर वह दूत हाथी से बोला“अरे दुष्ट हाथी ! तू इतना निडर होकर उस तालाब में नहाने क्यों आता हैं।" तिम्हें यहीं कहने आया हूं कि आज के पश्चात् उस तालाब में मत आना।
यह सुनते ही हाथी राजा बोला—“अरे भाई ! तुम कौन हो ?"मैं लम्बकरण नाम का खरगोश हूं और चन्द्रमण्डल में रहता हूं, इस समय भगवान चन्द्र ने मुझे अपना दूत बनाकर तुम्हारे पास भेजा है।"
राजा हाथी ने उसे चन्द्रमा दूत जान झट से कहा-“भाई ! चांद की जो आज्ञा हो हमें बताओ।" | "महाराज ! आप और आपके साथियों ने उस तालाब पर जाकर बहुत से खरगोशों को मार डाला । परन्तु आप क्या यह
नहीं जानते कि यह मेरा परिवार है।

“इस समय चांद देवता कहां हैं ?" हाथी ने पूछा। “वह इस समय उन दुःखी खरगोशों के पास हैं और उन्हें हौसला दे रहे “यदि तुम्हारी बात सत्य है तो हमें चांद देवता के दर्शन करवा दो ताकि हम अपने घर वापिस चले जाएं।"ठीक है, आप मेरे साथ अकेले ही आओ, मैं आपको चांद के दर्शन करवाता हूं।" इस प्रकार वह चालाक दूत खरगोश रात के समय उस हाथी राजा को तालाब के पास ले गया। तब पानी में चांद की छाया पड़ रही थी।“लो महाराज, देखो मेरे स्वामी चांद को।” खरगोश ने इशारा किया।

उस हाथी ने जैसे ही तालाब में चांद को देखा तो उसे विश्वास हो गया कि देवता स्वयं इस तालाब में आ गए हैं। अब तो यहां से जाना होगा। इस प्रकार हाथी चांद को प्रणाम करके वापस चल पड़ा। अब खरगोश
आनन्द से रहने लगे। मैं आपको यह बताना चाहता था कि बड़ों के नाम से भी बहुत प्रभाव पड़ता है। उनके नाम से ही लोग डर जाते हैं। यह बात याद रखने योग्य है कि आलसी, बजदिल, कायर, वचनन निभाने वाले और पीठ पीछे निन्दा करने वालों को भी कभी राजा मत बनाओ । प्राचीन काल में दुष्ट राजा के पास जाकर न्याय मांगने वाले खरगोश और गौरैया नाम के दो जानवर रहते थे ।"फिर उनका क्या हुआ ?" लो सुनो, मैं उन दोनों की कहानी सुनाता हूं