अहंकार बुरा-पंचतंत्र की कहानियां

Apr 05,2021 06:55 AM posted by Admin

किसी तालाब में दो मच्छ रहते थे। एक मेंढक से उनकी दोस्ती हो गई। कार वे तीनों तालाब में रहने लगे और अपना दःख सुख कहकर मन बहलाते रहते । मेढक को यह नहीं पता था कि इन दोनों मच्छों में से एक मन्द बद्धि और दूसरा अहंकार बुद्धि वाला है। एक दिन वे तीनों तालाब के किनारे बैठे बातचीत कर रहे थे कि एक शिकारी हाथ में जाल और सिर पर बहुत-सी मछलियां रखे आया और तालाब की ओर देखकर बोला, “यहां तो काफी मछलियां लगती हैं, इन्हें कल आकर पकडूंगा।"

शिकारी के जाने के पश्चात् तीनों मित्र सोच में पड़ गए । मेंढक और तेज बद्धि मच्छ तो बोले कि हमें यहां से भाग जाना चाहिए, लेकिन अहंकार से भरा मच्छ बोला, नहीं हम यहां से भागेंगे नहीं, प्रथम तो वह आएगा नहीं, यदि आ भी गया तो मैं अपनी ताकत और बुद्धि से तुम्हारी रक्षा करूंगा। मंद बुद्धि ने अपने मित्र की बात सुन झट से कहा "हां.... हां... मेरा मित्र ठीक कहता है, यह शक्तिशाली भी है और बलवान भी तभी तो इसे अहंकार है, ठीक ही कहा जाता है कि बुद्धिमानों के लिए कोई ऐसा काम नहीं जिसे वह न कर सके।

देखो सशस्त्र नन्दों का चाणक्य ने अपनी बुद्धि द्वारा नाश कर दिया। जहां पर रवि की किरणें और वायु नहीं पहुंच सकते वहां पर बुद्धि पहुंचती है। इसलिए हम यहां से भागकर कहीं भी नहीं जाएंगे। मेंढक उन दोनों की बातें सुनकर बोला, “मित्रो ! मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं, इसलिए मैं आज ही अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर भाग रहा हू।" यह कहकर मेंढक वहां से चला गया। दूसरे दिन सुबह ही शिकारी वहां आया, उसने अपना जाल लगाकर इन पाना मच्छों को पकड़ लिया। उनका अहंकार और मंद बुद्धि ही इन्हें ले डूबे । है। इसलिए कहा भी गया है कि मित्र की सलाह को नहीं ठुकराना चाहिए। मना करने पर भी आप विद्या के अहंकार और लोभवश नहीं रुके । ठीक कहा ह कि हे मामा. मेरे रोकने पर भी आप चपन रहे । अब गीत के पुरस्कार वरूप यह अपूर्व मणी आप ने बंधवाया है। बाह्मणी ने पूछा, “यह कैसे ?" "लो सुनो वह कहानी-"