तने भी कटहल खाई क्या-दादी माँ की कहानी

Apr 07,2021 03:07 AM posted by Admin

बहत पुरानी बात है। एक व्यापारी किसी दूसरे देश में पहली बार बांग्ला व्यापार करने गया और अपने देश से लाया हुआ सामान बाजार में बेचने निकल दोपहर होने पर उसे भूख लगी। सामने फलों की एक दुकान थी, उसका फल खाने को हुआ। फलों की दुकान पर तरह-तरह के फल लटके हुए थे। उन्ही फलों में एक कटहल भी लटका हुआ था। कटहल उसके लिए बिल्कुल नया था। वह उसे हैरानी से देखता रहा, फिर उसने उसे सूंघा तो उसे उसकी सुगंध बहुत अच्छी लगी कि उसके मुँह में पानी भर आया किन्तु उसने सोचा जब फल इतना बड़ा है तो इसके दाम भी अधिक होंगे क्योंकि वह कंजूस किस्म का व्यक्ति था। अत: काफी देर सोचता रहा, मगर कोई निर्णय न कर पाया। जब उसका मन न माना तो उसने हिम्मत करके दकानदार से उसका मूल्य पूछा "क्यों भाई ? यह फल कितने का है ?"

दुकानदार ने कहा-"आठ आने।"व्यापारी को लगा जैसे दुकानदार ने ज्यादा कीमत बताई है उसका मन हुआ कि दुबोरा पूछ ले लेकिन फिर कुछ सोचकर उसने दुकानदार को पैसे देकर फल ले लिया। कटहल को कंधे पर रखकर वह अपनी मुकाम पर चल दिया। व्यापारी बार-बारा दल को संघता और सोचता, कितना सस्ता सौदा किया है और फिर भाग-भागकर तय करता क्योंकि उसे भूख लगी थी और वह अपने मुकाम पर जल्दी पहुँचकर फल का स्वाद चखना चाहता था। आखिर उसके धैर्य ने जवाब दे दिया और वह वहीं सड़क के किनारे एक बाग में बैठकर पूरा का पूरा कटहल खा गया। इतना बड़ा कटहल खाकर उसका पेट फूल गया। कटहल का रस उसके हाथों, चेहरे, दाढ़ी और कपड़ों पर जम गया।

उसने सोचा नदी पर जाकर पानी से धो लूंगा किन्तु पानी से धोने पर वह और भी सख्त हो गया। अब व्यापारी की दशा अजीब थी। उसके कपड़ों पर बड़े-बड़े धब्बे नजर आ रहे थे। दाढी तथा मंचों के बल एक-दूसरे से बुरी तरह चिपक रहे थे।

अब व्यापारी को बहुत उलझन हो रही थी। जब सादे पानी से रस न छूटा तो उसने साबुन मला, किन्तु साबुन के प्रभाव से रस और सख्त हो गया। मिट्टी, धूल और सूखे पत्ते उड़-उड़कर उसके बालों से चिपक गए। जो उसे देखता, उसकी दुर्दशा पर हंसता। जैसे-जैसे हवा चलती वह खुश्क होता जाता। व्यापारी के चेहरे और हाथों की खाल अकड़ने लगी और दाढ़ी-मूछों के बाल सख्त होने लगे। इससे उसे बड़ा कष्ट हुआ। इसी परेशानी में रात हो गई। उसने सोना चाहा तो कष्ट के कारण उसे नींद न आई।

सुबह जब वह उठा, तो उसका तकिया उसके सिर से चिपका हुआ था। उसने तकिये को छुड़ाना चाहा तो उसके सिर के बाल उखड़ गए। इससे उसे बहुत दर्द हुआ। दर्द के मारे उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह इस मुसीबत से कैसे छुटकारा पाए ? पिछला दिन तो उसका बरबाद हो चुका ता। उसने सोचा, आज का दिन क्यों परबाद करें ? वह अपनी इसी अवस्था में बाजार चला गया ताकि अपना माल बेचकर माल खरीद सके और वापस अपने देश जाने की तैयारी करे। जस दुकान पर भी वह लेन-देन करने के लिए बैठता, कुछ न कुछ उसके हाथो में चिपक जाता। लोग उसे चोर समझकर बुरा भला कहते। इससे उसे बहुत लज्जितहोना पड़ता।

इसी प्रकार वह एक दुकान पर अपना माल बेचने पहुंचा। वह हीरे-जवाहरात कर दुकान थी। व्यापारी ने अपने तौर पर बहुत सावधानी बरती, किन्तु फिर भी एक ही उसके हाथ से चिपक गया। दुकानदार ने उसे उठाईगिर समजकर उसे मारना शुरू कर दिया।दुकानदार ने जैसे ही उसके गाल पर थप्पड़ मारा वैसे ही उसका हाथ व्यापारी के गाल से चिपक कर रह गया। दूसरे हाथ से उसने व्यापारी की गर्दन पकड़ी तो उसका हाथ गर्दन से चिपक गया। - अब दुकानदार समझ गया कि यह कोई चोर नहीं बल्कि मुसीबत का मारा है।

व्यापारी ने रो-रोकर अपनी सारी व्यथा दुकानदार को सुनाई।दुकानदार ने कहा-"अजनबी, तुमने बड़ी गलती की। जिस चीज के बारे में तुम नहीं जानते थे। उसका उपयोग करने से पहले उसके बारे में किसी से पूछ तो लोते। तुमने जल्दबाजी से काम लिया।"व्यापारी ने उत्तर दिया-"बंगाली भाई, मैंने अपनी गलती की सजा भुगत ली है। अब आप मुझे इस मुसीबत से छुटकारा दिलाने की कोई तरकीब बताए।"दुकानदार ने कहा-"एक ही तरकीब है और वह यह कि तुम अपने बाल मुंडवा दो और यह कपड़े उतार कर दूसरे कपड़े पहन लो।"


बेचारा व्यापारी नाई के पास गया और उसने अपने सारे बाल मुंडवा लिये। इस प्रकार उसके प्राण इस संकट से छूटे। उसके बाद जब वह किसी ऐसे व्यक्ति से मिलता जिसके बाल मुंडे हुए
होते तो वह उसके कान के पास जाकर पूछता-"क्या तुमने कटहल खाई थी ?"