तीतर की होशियारी-दादी माँ की कहानी

Apr 08,2021 06:18 AM posted by Admin

एक जंगल में एक तीतर और लोमड़ी बड़े प्रेम से रहते थे। लोमड़ी चट्टान के नीचे एक खोह में रहती थी और तीतर उसके पास ही झाड़ी में रहता था। जंगल के आस-पास कई गाँव थे। एक गाँव में पनचक्की थी। वहाँ गेहूँ पीसा जाता था। चक्की का मालिक एक नौजवान था। चार पाँच उसके दोस्त थे जो. उसके साथ ही रहते थे। जब तक चक्की चलती रहती, तब तक वे सब जंगल में घुस जाते और पक्षियों और छोटे जानवर खरगोशं आदि का शिकार करते, फिर उन्हें भूनकर मजे से खाते। इस कारण जंगल के पक्षी व छोटे जानवर भयभीत रहते । तीतर और लोमड़ी भी परेशान रहते। एक दिन तीतर और लोमडी घमने निकले।घूमते-घूमते वे चक्की के पास आ गए। उस समय वहाँ चक्की वाला नहीं था। वह अपने साथियों के साथ शिकार करने गया था। तीतर ने लोमड़ी से कहा-"जा बहन, तू पेट भरकर आटा खा, जब चक्की वाला आएगा, तो मैं तुम्हें आवाज लगा दूगा।

उस दिन लोमडी ने पेट भर आटा खाया। इसी तरह लोमड़ी रोज पेटभर आर खाती। चक्की वाला रोज आटा कम देखकर परेशान हो जाता। अब उसने शिकार पर जाना छोड़ दिया। उधर, लोमड़ी को आटा खाने की आदत पड़ गई थी। जब काफी दिनों से आटा खाने को नहीं मिला तो उसे बड़ी बेचैनी होने की एक दिन लोमड़ी ने तीतर से कहा-"अब तो आटा खाने को मिलता ही नहीं क्योंकि चक्कीवाला हमेशा चक्की के पास ही बैठा रहता है।"ततिर से लोमडी की परेशानी देखी न गई तो वह बोला-"तम चिन्ता बहन । आज तुम मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें आटा खिलाकर लाता हूँ।" "मगर कैसे भइया ?"तब तीतर ने उसे अपनी योजना समझाई। दोनों छिपते-छिपाते गाँव में पहुँचे। वहाँ जाकर तीतर चक्की वाले के पास फुदकने लगा।

चक्की वाले लड़के और उसके दोस्तों ने घर बैठे शिकार आया देखकर मन-ही-मन खुश हए और फिर वे पत्थर लेकर उसके पीछे दौड़े। तीतर उन्हें भगाकर दूर ले गया।उधर लोमड़ी ने पेट भर आटा खाया। फिर दोनों जंगल में भाग गए।एक दिन लोमड़ी ने तीतर से कहा-“भैया तीतर ! इन लोंगों ने जंगल के जीवों को बहुत परेशान कर रखा है। इन्हें सबक सिखाना चाहिए।"तीतर ने कहा-"तुम देखती जाओ कि मैं क्या करता हूँ?"एक दिन चक्की वाला और उसके दोस्त चक्की के बाहर बैठे शिकार पर जाने की योजना बना रहे थे, सभी के हाथों में लाठियाँ थीं। तभी तीतर वहाँ पहँचा और उड़कर एक लड़के के सिर पर बैठ गया। बगल वाले ने अपनी लाठी उसके सिर पर दे मारी। तीसरे ने उसके सिर पर लाठी मारी। इसी तरह उड़-उड़कर सबके सिर पर बैठता रहा। सब तीतर को मारने के चक्कर में एक-दसरे के सिर पर लाठियाँ मारते रहे। देखते-ही-देखते सबके सिर में गमड निकल आए। वे सब अपना-अपना सिर मसलते-मसलते एक-दूसरे को भला-बुरा कहने लगे।इधर, तीतर उन्हें चकमा देकर झाड़ियों में छिपी लोमड़ी के पास पहुँचा तो देखा कि उसका तो हँसते-हँसते बुरा हाल है।"क्यों बहन कैसी रही मेरी तरकीब ?"बहुत बढ़िया, बहुत मजा आया।"उसके बाद लोमड़ी और तीतर इसी प्रकार घूम-घमकर शिकारियों का पर करते। अत: उन्होंने पक्षियों व छोटे जानवरों का शिकार करना छोड़ दिया। अ जंगल के जानवर निर्भय होकर अपना जीवन व्यतीत करने लगे।