ताकतवर से दूरी ही अच्छी-दादी माँ की कहानी

Apr 06,2021 03:12 AM posted by Admin

एक बार कई दिन तक खूब मूसलाधार वर्षा हुई जिसके कारण बाढ़ आ गई । बाढ़ के कारण कई मकान किर पड़े और घरों का सामान भी पानी में बह गया।

यह संयोग ही था कि दो मटके पानी की धारा में साथ-साथ बहने लगे। उनमें एक मटका पीतल का बना हुआ था और दूसरा मिट्टी का।पीतल का मटका बहुत मजबूत था, उसे कीसी भी चीज़ से टकराने में कोई भय नहीं था। परन्तु मिट्टी के मटके को सदैव यह भय बना हुआ था कि यदि किसी चीज़ से टकराया तो टूट जाएगा।

जब पीतल के मटके ने मिट्टी के मटके को देखा तो उसे उसके मुख पर भय की परछाईं साफ नज़र आई। अतः वह मिट्टी के मटके के साथ बोला-"भैया मेरे निकट ही रहो। मैं हर प्रकार से तुम्हारी रक्षा करूँगा।" मैं तुम्हारी हर खतरे से रक्षा करूँगा क्योंकि मैं शक्तिशाली हैं।यह सुनकर मिट्टी का घड़ा बोला-"भाई साहब! यह तो और भी खतरे की बात होगी। मैं तो शायद आपसे दूर रहकर ही सही-सलामत बहता रहूँ। परन्तु आपके निकट आना तो मेरे लिए अवश्य ही घातक सिद्ध होगा।"