सच्चा अधिकारी कौन-दादी माँ की कहानी

Apr 06,2021 03:19 AM posted by Admin

एक गाँव में चार मित्र रहते थे-बढ़ई, सुनार, पंडित और दर्जी। चारों में गहरीमित्रता थी चारो साथ-साथ ही रहते थे। एक दिन चारों ने निर्णय किया कि परदेस जा कर रोजी रोटी कमाई जाए। वे चारों साथ-साथ परदेश जानेके लिए रवाना हो गये। चलते-चलते शाम हो गई तो वे चारों एक गाँव के निकट एक मंदिर में ठहर गए। रात को भोजन के उपरांत जब वे चारों सोने लगे तो उन्हें ध्यान आया कि उनके पास रुपया पैसा है, अतः सभी का सोना ठीक नहीं। बारी-बारी प्रत्येक व्यक्ति पहरा देगा।

सबसे पहले बढई की बारी आई। तीनों मित्रों के सोने के बाद बढ़ाई ने समय गुजारने के लिए गरज से कुछ काम करने की सोची ताकि समय आसानी से बीत जाए। उसके पास एक लकडी पडी थी, उसके पासऔजार भी थे। बढ़ई ने उस लकड़ी से सुन्दर पुतली बना दी। वह पुतली इतनी सुन्दर थी कि किसी जीवित युवती का भ्रम होता था।बढई के बाद पहरा देने की बारी दर्जी की आई। उसने देखा कि बढ़ई ने काठ की सुन्दर पुतली बना दी है। उसने सोचा अब मुझे भी कुछ करना चाहिए जिससे समय भी कट जाएगा। उसने पुतली की सुन्दरता बढ़ाने के लिए सुन्दर-सुन्दर कपड़े सिलकर उसे पहनाए।उसके बाद सुनार की बारी आई। सुनाई ने सजी-धजी पुतली को सुन्दर-सुन्दर गहने बनाकर पहना दिये। जिससे वह और भी सुन्दर प्रतीत होती थी।अन्त में ब्राह्मण की बारी आई उसने संजीवन पाठ किया और पुतली में जान डाल दी। सुबह होते-होते पुतली एक सुन्दर स्त्री बन गई।अब चारों ही उस युवती पर अपना-अपना अधिकार जताने लगे। इस बात को लेकर चारों के बीच झगड़ा होने लगा।
तभी मंदिर के पुजारी भी वहाँ आ गए।चारों ने पुजारी से कहा कि वह पंच बनकर उनका फैसला करे।

उन्होंने पुजारी को पूरी बात बता दी। पुजारी ने उनकी बात सुनकर, खूब सोचकर अपना निर्णय देते हुए उनसे कहा-"बढ़ई ने पुतली बनाई और ब्राह्मण ने इसे जीवन दिया। इसलिए ये दोनों ही इसके पिता हैं। इन दोनों का युवती पितृवत स्नेह हो सकता है। दर्जी ने इसे कपड़े पहनाए, लड़की के विवाह में मामा कपड़े लाता है, इसलिए दर्जी युवती का मामा हुआ। लड़की के लिए गहने वर-पक्ष की ओर से आते हैं, यह काम सुनार ने किया। इसलिए यह चुवती को प्राप्त करने का सच्चा अधिकारी सुनार है।" चारों मित्रों ने पुजारी के निर्णय को स्वीकार किया और युवती सुनार को मिल मित्रता थी। गई। इसके बात चारों पुनः परदेश के लिए चल दिए। उनके बीच अब भी पहले जैसी