राजा का न्याय-दादी माँ की कहानी

Apr 09,2021 02:46 AM posted by Admin

बहुत पुराने समय की बात है। करणपुर नामक राज्य में करण नाम का राजा राज करता था। राजा बहुत न्यायी था। वे बहुत बुद्धिमान, निडर आ साहस से भरा हुआ था। प्रजा राजा से बहुत खुश थी।
क्योंकि राजा उन्ह दिक्कत नहीं होने देता था।एक बार की बात है, राजा अपने सैनिक के साथ शिकार खेलन चल दिए। जब जंगल पहुँचे तो काफी देर तक वे शिकार की प्रतिक्षा कर


थे परन्तु उन्हें कहीं भी कोई शिकार नहीं मिला। दोपहर बीत गए फिर तीसरे पहर भी बीत गए परन्तु कहीं भी कोई जानवर नहीं मिला। राजा बोले"चलो चलते हैं" पुत्र प्रतिक्षा कर रहे होंगे। राजा और उसके सैनिक महल की ओर लौट आए। जब राजा दूसरे दिन सुबह उठे तो उन्होंने शोर सुना। वे पछे-शोर क्यों हो रहा है? उसमें से एक आदमी बोला-"महाराज" आपके दरबारी हमें अन्दर नहीं आने देते हैं। राजा बोले-अन्दर आने दो। सभी आदमी अन्दर आ गए और राजा सिंहासन पर बैठे और बोले-क्या बात है ?पहला आदमी बोला-'महाराज' इस आदमी ने मुझसे छ: सौ रुपया ले लिया है और ये मंत्र मुझे मूलधन ही देता है, ब्याज नहीं दे रहा है।दूसरा आदमी रोता हुए बोला-'महाराज' ये आदमी झूठ बोल रहा है। मैंने इससे ब्याज से नहीं लिया हूँ।राजा ने पहले आदमी से पूछा-क्या ये सच है कि तूं इससे ब्याज वे नहीं लिया है या तुम इसे पैसे दिए होगे और ब्याज के बारे में नहीं बोले होगे। - पहला आदमी-महाराज, मैंने जब इसे छ: सौ रुपये दिए तब इसने बोला कि मैं तुम्हें ब्याज भी दे दूंगा और मैंने कुछ नहीं कहा।तभी दूसरा आदमी बोला-महाराज, ये आदमी झूठ बोल रहा हैं । मैंने इसे ये बात नहीं बोली है।लेकिन वह आदमी उसी बात को दोहराता रहा।राजा करण अब सोच में पड़ गए। अब वे निर्णय नहीं कर पा रहे थे। कुछ देर सोचने के बाद वे अपने मंत्री से बोले-जाओ। दो तलवार लेकर आओ।कुछ देर बाद मंत्री तलवार लाया।

वह दोनों आदमी एक-दूसरे के चेहरे देखने लगे। उसने समझा राजा गुस्से में हैं। आज वे हम दोनों का सिर उतार ही देंगे। राजा बोले-क्या सोच रहे हो। तभी वह दोनों हड़बड़ा गये। जा राजा बोले-तुम दोनों 12.00 बजे दोपहर में आना। कि दोनों आदमी चले गये। राजा नहा-धोकर अपने महल में चले गए। राजा अब सोच में पड़ गए। काफी देर सोचने के पश्चात् वे एक उपाय किए। उन्होंने अपने मंत्री से कहा-जाओ तेज गंध लेकर आओ। फिर मंत्री तेज गंध कर आया, राजा ने तेज गंध को दोनों तलवार में पोत दिया और बन्द कर दिया। जब 12.00 बजे दोनों आये, तो राजा बोले-एक तलवार तम एक तलवार तुम लो। कल सुबह आना और हाँ, जो झूठा होगा। तलवार गंध करेगा। लेकिन जो ईमानदार होगा। वह आदमी इस तलवार म्यान से निकालना नहीं। दूसरे दिन सुबह में दोनों आये और राजा दो तलवार को निकलाने एक तलवार में पहले जैसा गंध था और दूसरे तलवार में पहले जैसा गंध नहीं था। पर राजा पहले आदमी से बोला-तुम हमेशा झूठ बोले । मैं तुम्हें दो वर्ष की सजा देता हूँ और पाँच सौ रुपया तुमको देना पड़ेगा। पहले आदमी ने माफी मांगी परन्तु राजा ने माफ नहीं किया और बोले-अगर तुम कल सुबह में झूठ नहीं बोलते तो मैं तुम्हें माफ कर सकता था।