परछाईं पर किसका हक-दादी माँ की कहानी

Apr 07,2021 06:38 AM posted by Admin

एक व्यक्ति ने यात्रा पर जाने के लिए गधा किराए पर लिया और उस पर सामान आदि लादकर यात्रा पर निकल पडा। गधे का मालिक गधे को हांफता-हांफता उसके पीछे चल रहा था। चलते-चलते दोपहर हो गई तोराही ने कुछ देर आराम करने की सोची।मगर आसपास कहीं भी कोई छायादार वृक्ष नहीं था। अतः यात्री ने गधे की परछाईं में आराम करने का फैसला किया, इस पर गधे के मालिक ने सख्त एतराज उठाया और बोला कि गधे की परछाईं में मैं आराम करूँगा। यात्री बोला-"क्यों भाई ? तुम क्यों आराम करोगे ? गधे की छाया में आराम करने का अधिकार तो मेरा है, मैंने तुम्हें गधे का किराया दिया है।"तुमने सिर्फ गधे पर सामान ढोने का किराया दिया है, उसकी परछाईं में आराम करने का नहीं।" इस प्रकार उन दोनों में बहस होने लगी। जब गधे ने देखा कि वे दोनों आपस में ही उलझे हुए हैं तो नजर बचाकर वह वहां से चलता बना और निकट के जंगल में जाकर आजादी की सांस ली। अपनी पीठ पर लदा सामान फेंक दिया और मजे से हरी-हरी घास और मुलायम पत्तियां खाकर आनन्द मनाने लगा।