मस्तमौला फकीर-दादी माँ की कहानी

Apr 06,2021 04:36 AM posted by Admin

एक ब्राह्मण रास्ते में जा रहा था। उसे एक बनिया मिला। पूछने पर दोनों ने बताया क वे मदद मांगने राजा के पास जा रहे हैं। कुछ आगे जाने पर उन्हें एक फकीर मिला। दोनों ने कहा कि तुम भी हमारे साथराजा के पास चलो और कुछ मांग लो। इस पर फकीर भी उनके साथ चल दिया। तीनों दरबार में पहुँचे। राजा ने ब्राह्मण से पूछा कि आप कैसे पधारे। ब्राह्मण बोला-"महाराज ! मेरी पत्नी का स्वर्गवास हो गया है।घर के काम-काज के लिए मुझे एक दासी चाहिए।" राजा ने बहुत-सा धन और एक दासी ब्राह्मण को देकर बनिए से पूछा-"तुम कैसे आए ?"

"महाराज! मेरा व्यापार डूब गया है, उसे दोबारा चलाने के लिए जरूरत है। यदि पाँच सौ स्वर्ण मुद्राएं मिल जाएं तो ।" राजा ने उसे पाँच सौ स्वर्ग मुद्राएं देकर फकीर से पूछा- "तुम्हें क्या चाहिए ।
फकीर बोला-"मुझे कुछ नहीं चाहिए महाराज! बिना मांगे ही ईश्वर मेरी आवश्यक पूरी कर देता है। यह उत्तर राजा को बुरा लगा। मगर उसने बिना कुछ कहे तीनों को विदा कर दिया। उनके जाने के बाद राजा ने एक सिपाही को बुलाकर कहा-"इन तीनों में से जिसके पास कुछ न हो, उसका सिर काट लाओ।"उधर बनिए ने अपनी थैली फकीर को थमा दी थी। राजा के सिपाही गए बनिए का सिर काटकर ले गए। राजा को यह देखकर बड़ा दुःख हुआ। उसने सैनिक से कहा-"जिसके साथ स्त्री न हो, उसका सिर काट लाओ।"

सैनिक चला गया। उधर ब्राह्मण अपना धन और दासी फकीर के हवाले कर कहा कि वह लघुशंका करना चाहता है अत: मेरा धन-स्त्री संभालो। पीछे से राजा का सैनिक ब्राह्मण का सिर काटकर ले गया। राजा ने ब्राह्मण का सिर देखा तो सोचने लगा कि फकीर ठीक कहता था, जो कुछ नहीं मांगता उसे सबकुछ मिल जाता है।