महा कंजूस-दादी माँ की कहानी

Apr 07,2021 03:11 AM posted by Admin

किसी समय की बात है-एक नगर में दीनानाथ नामक एक सेठ रहता था। वह बढ़त कंजस था। एक दिन दीनानाथ कहीं जा रहा था। रास्ते में उसने एक आम का पेड देखा जिस पर पके हुए फल लगे थे। पके आमों को देखकर सेठ के मुँह में पानी भर आया और वह आम खाने की इच्छा से पेड़ पर चढ़ गया।उसके मन में घबराहट हो रही थी कि कोई देख न लें। इतने में किसी आदमी के आने की आहट सुनकर वह घबरा गया और जल्दी जल्दी पेड़ से उतरने की कोशिश करने लगा, परन्तु पेड़ ऊँचा था, वह उतना कठिनाई अनुभव कर रहा ता।

इस प्रकार विपत्ति मं पड़ा हुआ सेठ दीनानाथ ने मन मन ईश्वर से कहा- "हे ईश्वर, मैं गरीब आदमी हूँ, एक हजार ब्राह्मणों को भोजन नही करा सकूँगा। मैं सेवल पाँच सौ ब्राह्मणों को भोजन कराऊँगा।" मुझे नीचे उतार दो। कुछ और नीचे उतरने पर उसकी नीयत फिर बदली और इस प्रकार नीचे आतेआते उसकी नीयत में फर्क आता चला गया। अन्त में जब वह उतर गया उसने कहा"हे भगवान् मैं केवल एक ही ब्राह्मण को भोजन करा सकता हूँ।"

जब वह घर आया तो उसे दूसरी चिन्ता सताने लगी कि ब्राह्मण तो बहुत अधिक खाते हैं। फिर वह अनेक ब्राह्मणों के पास गया और उनसे भोजन की मात्रा के बारे में पूछने लगा तो उन्होंने काफी मात्रा की मांग की।अन्त में एक ब्राह्मण मिला जो अल्पाहारी था। उसने केवल सौ ग्राम आचा और एक चम्मच नमक पर्याप्त होंगे। यह सुनकर सेठ प्रसन्न हुआ और दूसरे दिन के लिए निमन्त्रण दे आया। फिर विचार करने लगा-"उसे भोजन करते हुए कैसे देखा जाए?"दूसरे दिन वह सेठानी से यह कहकर चला गया कि अमूक ब्राह्मण जो मांगे, दे देना और पूरे दिन नहीं लौटा। जब ब्राह्मण ने देखा कि सेठ घर पर नहीं है तो सारा रहस्य समझ गया और सेठानी से भोजन सामग्री की मांग की। उसने सारी व्यस्था कर दी।

स्वादिष्ट और बहुमूला भोजन पाकर ब्राह्मण ने पूरी कसर निकाली और अन्त में दक्षिण स्वरूप दस अशर्फियों की मांग की और कहा कि सेठ जी से ये सारी बातें पहले ही तय हो गई थी और वे सहमत हो गये।सेठानी ने दक्षिणा सहर्ष दे दी क्योंकि सेठ ने सवेरे सेठानी को संक्षिप्त बात ही बताई थी।ब्राह्मण खुशी-खुशी चला गया। रात को जब सेठ घर लौटा तो सेठानी ने सारी बात बता दी।बात सुनकर सेठ जी बेहोश हो गए। जब उन्हें होश आया तो सोचने लगे-मुझे मेरी नीयत का फल मिल गया।