लालच बुरी बला है-दादी माँ की कहानी

Apr 06,2021 02:57 AM posted by Admin

एक गाँव में एक किसान रहता था। वह बहुत लालची था। वह रात-दिन मेहनत करता। वह खूब पैसा भी कमाता था लेकिन खर्च कुछ भी नहीं करता था। जब कभी उसका मन मांसाहार खाने को करता, वह जंगल में जाकर कोई जीव मार लाता और उसे पकाकर पति-पत्नी दोनों खा लेते। एक दिन वह जंगल से एक सुनहरी मुर्गी को पकड़ कर घर ले आया। उसकी पत्नी मुर्गी को देखकर बहुत खुश हुई, क्योंकि वह भी पति की तरह ही लालची थी। कि वह फौरन ही चाकू लेकर मुर्गी को हलाल करने बैठ गई। वह मुर्गी की गर्दन पर चाकू चलाने वाली ही थी कि मुर्गी ने कहा-" मुझे मत मारो, मैं तुम्हें मालामाल कर दूंगी।" मुर्गी को मानव की बोली में बात करते देख किसान की पत्नी डर गई। उसने चिल्ला कर अपने पति को बुलाया-" सुनो जी, यह तो कोई मायावी है। यह तो तुम्हारी तरह बोलती है।"किसान यह सुनकर चौंक पड़ा और बोला-" क्या कहा भागवान ? हमारी तरह बोलती है।" "हां, यह कहती है कि हमें मालामाल कर देगी।" "यह अपनी जान बचाने के लिए शायद ऐसा कर रही है। ला, चाकू मुझे दे, मैं इसे काटूं।" अरे, ओ मूर्ख किसान । मेरी बात ध्यान से सुन।" मुर्गी ने हिम्मत बटोरकर कहा-" मेरी जान बखश दे, मैं तुम्हें मालामाल कर दूंगी।" किसान ने कहा-" अच्छा, भला तूं मुझे मालामाल कैसे करेगी ? तू क्या मुझे मूर्ख समझती है ?" किसान की आँखों में लालच उभर आया। तब मुर्गी बोली- " मैं रोजाना तुम्हें सोने का एक अण्डा दूंगी।" " सोने का अण्डा।" "हाँ, तुम मुझे एक अच्छे से दड़बे में रखो और अच्छा दाना दो। कल सुबह जब तुम मेरा दड़बा खोलोगे तो तुम्हें वहाँ से एक सोने का अण्डा मिलेगा ?

मुर्गी की बात सुनकर किसान के मुँह में पानी आ गया और वह अपनी पत्नी की तरफ देखने लगा। किसान की पत्नी बोली-“ क्या पता ये मुर्गी सच कह रही हो। एक वार आजमा लेते हैं। अगर इसकी बात झूठ निकली तो हम इसे कल हलाल कर देंगे।" किसान को अपनी पत्नी की बात ठीक लगी। उसने मुर्गी को एक बढ़िया दड़बे में रखा और अच्छा दाना-पानी दिया। दूसरे दिन पति-पत्नी ने मुर्गी का दड़बा खोलकर देखा तो उन्हें यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि मुर्गी के पास सचमुच एक सोने का अण्डा रखा था। किसान ने लपक कर उसे उठा लिया। उस दिन से रोज ही ऐसा होने लगा। मुर्गी रोज सोने का एक अण्डा देती। अण्डों को पाकर कुछ ही दिनों में किसान अमीर हो गया। उसने कच्चे मकान की जगह पक्की हवेली बनवा ली। खेतों की देखभाल के लिए नौकर रख लिए। कहीं आने-जाने के लिए एक घोड़ागाड़ी खरीद ली। अब किसान के पास सब कुछ था, लेकिन उसकी तष्णा नहीं भरी। वह चाहता था कि उसके पास और अधिक धन हो क्योंकि अभी वह गाँव के जमींदार के बराबर अमीर नहीं हुआ था।


धन बढाने के साथ-साथ, उसका लालच भी बढ़ता जा रहा था। कभी-कभी वह सोचता कि काश ! उसकी सुनहरी मुर्गी दो अण्डे रोज दे। एक बार उसके मन में विचार आया कि मुर्गी के पेट में अण्डे ही अण्डे भरे पड़े हैं. मगर यह दुष्ट मुर्गी जानबूझ कर मुझे एक ही अण्डा देती है। अगर मैं इसका पेट पोरकर सभी अण्डे एकत साथ निकाल लूं तो अच्छा रहेगा, मैं उस धन से और अधिक धनवान बन जाऊंगा। बस, यह ख्याल मन मन में आते ही उस लालची किसान की बेचैनी बढ़ गई। उसने उसी समय छुरी उठाई और जाकर मुर्गी को पकड़ लिया। मर्गी बहत रोई, गिडगिड़ाई और उसने किसान को समझाया कि ज्यादा लालच मत करो। अगर तुम लालच में अंधे होकर मुझे मार दोगे तो एक अण्डे रोज से भी हाथ धो बैठोगे। मगर किसान तो समझ रहा था कि मुर्गी अपनी जान बचाने के लिए उसे बेवकूफ बना रही है, इसलिए उसने उसकी एक न सुनी उसका पेट चीर दिया। मुर्गी मर गई। उसके पेट से कोई अण्डा न निकला। अब तो किसान हाथ मलता रह गया। इसीलिए कहते हैं कि लालच बुरी बला है। इंसान को जीवन में कभी लालच नहीं करना चाहिए।