किस्सा बालरहित हथेली का-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 09,2021 05:34 AM posted by Admin

एक दिन अकबर-बीरबल तथा अन्य दरबारियों के साथ घुड़सवारी के लिए निकले। काफी समय तक घुडसवारी करने के बाद वे एक घने जंगल में पहुंचे तो शहंशाह ने निर्णय लिया कि उन सबको कुछ देर विश्राम के लिए वहां रुकना चाहिए। इसलिए जब वे एक तालाब के पास पहुंचे तो उन्होंने सबको वहीं रुकने का आदेश दिया। अपने घोड़े से उतर कर शहंशाह पानी पीने तथा मुंह धोने के लिए तालाब की ओर चल पड़े।
आगे बढ़ते-बढते सम्राट अकबर अनजाने में ही अपने हाथों की दोनों हथेलियों को रगड़ते जा रहे थे; क्योंकि बहुत समय तक घुड़सवारी के कारण वह उनमें पीड़ा का अनुभव कर रहे थे। ऐसा करते हुए अचानक उनकी नज़र अपनी दोनों हथेलियों पर पड़ गई तथा उन पर पड़ी हुई गहरी धारियां देख कर उन्हें अचानक सूझा कि उनकी हथेली पर कोई बाल नहीं था। इसलिए उसी समय वह बीरबल की ओर मुड़े और बोले, "बीरबल, क्या तुम बता सकते हो कि मेरी हथेली पर बाल क्यों नहीं हैं?"यह प्रश्न सुनकर बीरबल मन-ही-मन मुस्कराया, जबकि सभी दरबारियों ने एक-दूसरे की ओर यूं देखा मानो कह रहे हों कि अब तो बीरबल फंस गया।बीरबल ने एक क्षण सोचा और फिर उत्तर दिया, "जहांपनाह, इसका कारण पता लगाना बहुत सरल है।

आप इतने लोगों को उपहार तथा इनाम देते रहते हैं। ऐसा करते समय, आपकी दोनों हथेलियां आपस में रगड़खाती रहती हैं। ऐसे में इन पर बाल कैसे रह सकते हैं?यह उत्तर सुनकर अकबर अपना सिर हिलाने लगे। वह बीरबल के उत्तर से प्रसन्न हो गए थे, क्योंकि उसके माध्यम से उसने उन्हें यह बताया था कि वह खुले दिल के व्यक्ति थे परन्त तभी उन्होंने बीरबल से एक और प्रश्न पूछा, "किन्तु बीरबल, तुम्हारी हथेली पर भी बाल नहीं हैं। इसका क्या कारण हो सकता है?"बीरबल इस बार भी मस्कराया और बोला, "जहांपनाह, आप इतने खुल दिल के हैं कि आप मझे उपहार देते रहते हैं और मैं उन्हें प्राप्त करता रहता हूं और यह क्रिया बार-बार करते रहने से मेरी हथेलियों से बाल रगड़-रगड़ कर साफ हो जाते हैं।"यह सुनकर शहंशाह ने सोचा कि बीरबल सचमुच बड़ा ही चतुर है क्योंकि उसने एक बार फिर उन्हें अपने उत्तर से संतुष्ट कर दिया था। किन्तु वह उसे इतनी आसानी से कहां छोड़ने वाले थे? उन्होंने फिर पूछा, "तुम सही कह रहे हो, बीरबल! लेकिन मेरे दरबारियों के बारे में क्या कहते हो? उनकी हथेलियों पर भी बाल नहीं हैं।"यह प्रश्न सुनकर, सभी दरबारी एक-दूसरे की ओर देखकर मन-हीमन मुस्कराने लगे।

उन्हें लगा कि इस बार तो बीरबल को कोई जवाब नहीं सूझेगा, लेकिन उसे अपने उत्तर के साथ तैयार देखकर वे सभी विस्मित हुए बिना न रह सके।"जहांपनाह, इसका कारण पता लगाना भी कोई कठिन काम नहीं। वास्तव में आप अपने इस सेवक के प्रति सदा इतने अधिक उदार रहे हैं कि सभी दरबारी मारे जलन के हाथ मलने के अलावा कुछ कर नहीं पाते। इससे उनकी दोनों हथेलियां आपस में रगड़ती रहती हैं। ऐसे में भला और क्या आशा की जा सकती है? उनकी हथेलियां तो बालरहित होंगी ही।" यह सनकर शहंशाह अकबर के साथ-साथ उनके सभी दरबारी भी ठहाका लगाकर हंस पडे। "वाह! तुमने अपनी बात कितनी सफाई से कह डाली बीरबल।" शहंशाह ने कहा।जहां तक दरबारियों का प्रश्न था वे समझ न पाए कि वे अपने चेहरे कहां छिपाएं। वे यह बात कतई भी स्वीकार करने को तैयार न थे कि 'बीरबल ने उन्हें नीचा दिखा दिया था। यद्यपि वे अपनी भावनाओं को छिपाने के लिए बाहर से हंस रहे थे तथापि उन्हें भी मन-ही-मन यह मानना पड़ रहा था कि बीरबल की हाज़िरजवाबी सचमुच अद्वितीय थी।