किसान की सूझ-बूझ-दादी माँ की कहानी

Apr 09,2021 01:30 AM posted by Admin

एक बार एक किसान को अपने खेत में गड़ा खजाना मिला। उसकी पत्नी बडबोला थी, कोई बात उसके पेट में हजम न होती थी। किसान ने सोचा कि खजाने को कैसे अपने घर ले जाऊँ।यदि यूं ही ले गया तो मेरी पत्नी सबको बता देगी और राजा सारा खजाना छीन लेगा। यह सब विचारकर उसने एक तरकीब सोची।उसने जंगल में एक पिंजरा लगा रखा था, वह उसके पास पहुँचां। उसमें एक खरगोश फंसा था। किसान ने उसे निकाल लिया और नदी पर आकर जाल खींचा। उसमें एक मछली फंसी थी। किसान ने खरगोश को जाल में डालकर नदी में फेंक दिया और मछली को ले जाकर पिंजरे में डाल दिया। फिर पास के बाजार से ढेर सारी जलेबियाँ खरीद कर लाया। वे सभी जलेबियाँ उसने एक पेड़ पर फलों की तरह लटका दीं। उसके बाद वह अपने घर पहुंचा और अपनी पत्नी से बोला-"तुरंत मेरे साथ चलो। मुझे गड़ा खजाना मिला है, उसे ले आएं। रातों रात ले आयेंगे, तो कोई देखेगा भी नहीं"

"किसान अपनी पत्नी को लेकर चल दिया। वह पहले नदी पर गया और जाल खींचा बोला-"अरे वाह! आज तो जाल में खरगोश फँसा है। अब उधर चलकर पिंजरा भी देखें।" वह पत्नी को पिंजरे के पास ले गया-"अरे पिंजरे में तो मछली फंसी है। वाह! वाह!"उसने दोनों चीजें अपने थैले में डाल लीं। फिर आगे बढ़े। कुछ दूर चलने पर ही वह पेड़ आ गया जिस पर किसान ने जलेबियाँ टांगी थी। - अरे जलेबी का पेड़  वाह ! आओ जलेबी खाएं। उसने अपनी पत्नी से कहा और पेड़ से जलेबी तोड़कर खाने लगी।"कमाल है। मैंने तो आज तक जलेबी का पेड़ नहीं देखा था। उसकी पत्नी ने कहा, फिर वह भी जलेबी तोड़कर खाने लगी।" - उसके बाद किसान उस जगह पहुँचा, जहाँ उसने खजाना दबाया था। अब उसे किसी प्रकार की चिंता न थी। उसने वहाँ से खजाना निकाला और अपने घर आ गया और ठाठ से रहने लगा।हुआ वही जिसका उसे डर था। उसकी पत्नी ने सबको खजाना मिलने की बात बता दी। बात राजा तक भी जा पहुँची और राजा के सिपाही किसान को पकड़कर ले गये।

किसान को राजा के सामने पेश किया गया। राजा ने उससे पूछा-"तुम्हें खजाना मिला तो तुमने उसे राजकोष में जमा क्यों नहीं करवाया ?"सरकार ! मुझे तो कोई खजाना नहीं मिला।" "झूठ मत बोलो! तुम्हारी पत्नी ने सब कुछ बता दिया है।"महाराज! आप उसकी बातों पर ध्यान न दें, वह पागल है। अनापशनाप बोलती रहती है।"इसकी पत्नी को हाजिर किया जाए।" राजा ने आदेश दिया। तुरन्त किसान की पत्नी को हाजिर किया गया।राजा ने उससे पूछा-"सच-सच बताओ, तुम्हारे पति को खजाना कब और कहाँ से मिला। "महाराज! उस दिन रात होने पर यह मुझे नदी पर लेकर गए। जब इन्होंने नदी से कांटा निकाला तो उसमें एक खरगोश फंसा था। फिर जंगल में गए तो वहाँ पिंजरे में मछली फँसी पडी थी।"क्या अनाप-शनाप बता रही हो।" राजा गुर्राया-"काँटे में खरगोश और पिंजरे में मछली?"हाँ महाराज! फिर हमने जलेबी के पेड़ से जलेबियाँ तोड़कर खाई।" "जलेबी का पेड़ ? ओह मूर्ख औरत ....?" "मैं सच कह रही हूँ महाराज।"चुप रहो तुम्हारा पति ठीक कहता था कि तुम पागल हो, जाओ, चली जाओ यहाँ से।और राजा के आदेश से उन्हें छोड़ दिया गया। अपनी चालाकी और सूझ-बूझ पर किसान मन-ही-मन बेहद खुश हुआ। समझदारी, दूरदर्शिता और सूझबूझ से मनुष्य सब कुछ पा सकता है।