कौआ चला, मोर की चाल-दादी माँ की कहानी

Apr 08,2021 04:07 AM posted by Admin

एक कौआ जब-जब मोरों को देखता था तब-तब वह उनकी सुन्दरता देखकर ललचा जाता था और अपने मन में कहने लगता-"भगवान ने मोरों को कितना सन्दर ही आनन्द में अपना समय बिताता।" कितना मनोहर रूप दिया है। यदि मैं भी ऐसा सुन्दर, ऐसा मनोहर रूप पाता तो आनन्द एक दिन कौए ने देखा कि जंगल में मोरों के बहुत से पंख बिखर पड़े हैं। बस, कौआ उन्हें देखकर फुदक-फुदक कर नाचने लगा और कहने लगा-"वह भगवान् वाह! बडी कृपा की तुमने, जो मेरी पुकार सुन ली। मैं अभी इन पंखों को अपने लगाता हूँ और अच्छा-खासा मोर बन जाता हूँ।" इसके बाद कौए ने चोंच से मोरों को पंखा इक्ट्ठे किये और अपनी पूंछ के आस-पास लगा लिये। फिर वह अपना नया रूप देखते-देखते बोला-"वाह-वाह ! जरा कौए आकर देखें मुझे। भला वे क्या खाकर ठहरेंगे मेरे सामने । अब मैं मोरों से किस बात से कम हूँ ? एकदम उन्हीं के समान सुन्दर और मनोहर हो उठा हूँ। अच्था, तो अब चलूं उनके पास और आन्नद मनाऊँ उनके साथ।"

इस प्रकार कौआ बड़े अभिमान के साथ मोरों के सामने पहुँचा। उसे देखते ही मोरों ने जोर से एकठहाका लगाया और एक मोर ने चीख-चीख कर कहा-"जरा देखो तो इस नीच कौए को। ये हमारी फैंकी हुई पूंछे बटोर-बोटकर चला है मोर बनने। लगाओ इस बदमाश को चोंचों और पंजों से कस-कसकर ठोकरें।"इतना सुनते ही सबके सब मोर उस कौए परटूटपड़े और उन्होंने दे चोंचें, दे पंजे मारकर उसकी ऐसी गत बनाई कि उसमें वहाँ ठहरने की हिम्मत भी न रही। वह भागा-भागा कौओं के पास पहुँचा और उनसे कहा-'भाइयों, ये मोर तो कौओं से बड़ी शत्रुता रखते हैं। अभी थोड़ी देर पहलेकी बात है, मैं उनके पास गया तो वे सभी f कौओं को गालियाँ देने लगे।"इस पर बूढ़ा कौआ अपने भाइयों से बोला-"सुनते ही इस बदमाश की बातें। यह हमलोगों की हंसी उड़ाता था और मोर बनने के लिए पागल रहता था। इसे इतना ज्ञान भी न था कि जो प्राणी अपनी जाति से सन्तष्ट नहीं रहता. उसे बदलने की इच्छा रखता है, वह जहाँ भी जाता है वहीं अपमान पाता है।" आज यह मोर का रूप बनाकर मोरों के पास गया और अब उनकी बातें खाकर हम लोगों से मिलने आया है। बदमाश धोखे बाज कहीं का। जरा लगाओ तो इसे कसकर चोंचों और पंजों की मार। इतना सुनते ही सब कौए उस पर टूट पड़े।