कामचोर-दादी माँ की कहानी

Apr 09,2021 03:17 AM posted by Admin

पंकजवन में टीपू बन्दर सभी बन्दर से चालाक था। एक दिन रैतु खरगोश, जंबो हाथी और बिटु भालू आदि पंकजवन के जानवर को एक परेशानी थी। यह परेशानी थी कि शहर से उनके नाम से कोई चिट्ठी आती थी तो जम्बू जिराफ दोगुना समय लगा देता था वो भी पैसे पर और पैसे न देने पर चिट्ठी न मिलती थी। सभी ने निर्णय किया कि पंकजवन का डाकिया टीपू बन्दर को बनाया जाये, क्योंकि वह बहुत चालाक है। उस पंकजवन का डाकिया टीपू बन्दर बन गया। अब वह सभी को तुरंत चिट्ठी पहुँचा देता था। पंकजवन के सभी जानवर टीपू बन्दर से खुश थे। जब टीपू बन्दर ने देखा कि सब हमें चाहते हैं, तो वह पैसे की जगह एक केला लेता था। दिनों-दिन रही थी। अब वह केले के जगह पैसा ला उसकी का लगा। सभी जानवरों ने देखा कि अब टीपू बन्दर कामचोर हो गया है तो

पंकजवन में एक बैठक की। सभी बोले कि टीपू बन्दर कामचोर हो गया है। अब हमें डाकिया बिटू भालू को बना देना चाहिए, परन्तु जंबो हाथी बोलेअब इस जंगल में कोई भी नया डाकिया नहीं बनेगा।
सभी जानवरों ने पूछा-अगर नया डाकिया नहीं बनेगा तो चिट्ठी हमलोगोंको कैसे मिलेगी। जंबो हाथी ने कहा-अब शहर के रिस्तेदारों, दोस्तों, भाई एवं माता पिता को खबर भिजवा दे कि अब वे चिट्ठी न लिखें। तो देखोगे कि टीपू बन्दर अपने घर में बैठा रहेगा। तभी बिटू भालू ने कहा-जंबो भईया, हमें तो आपका उपाय बहुत अच्छा लगा।

परन्तु अगर किसी को शहर में कुछ हो जाये तो हमें खबर कैसे मिलेगी। सभी जानवर बोले-हाँ, हाँ कैसे मिलेगी? जंबों हाथी बोले-शांत हो जाओ। हम लोग मिलकर पंकजवन में एक बूथ खोलेंगे। सभी जानवर तुरंत नम्बर लगाएगें और बात हो जाएगी। सभी जानवर जंगल में एक बूथ खोलें और खुश हो गये। टीपू बन्दर को अपने भूल का एहसास हुआ और फिर ईमानदारी से साथ काम करने लगा। इसलिए बच्चों हमें अपना काम ईमानदारी के करना चाहिए। कामचोर नहीं बनना चाहिए और आप तो जानते ही हैं कि ईमानदारी सबसे अच्छी निति है। फिर भी भूल कर बैठते हैं।