जैसी करनी वैसी भरनी-दादी माँ की कहानी

Apr 07,2021 07:43 AM posted by Admin

एक वृक्ष पर एक गिद्ध रहता ता। वृक्ष पर घोंसले में उसके बच्चे ते। एकी गिद्ध को कोई शिकार न मिला। बच्चे भूख से बिलबिलाने लगे। गिद्ध एक बार फिर जंगल की ओर चल दिया ताकि कहीं के कुछ मिल सके।उड़ते-उड़ते अचानक उसकीनजर एक लोमड़ी के बच्चे पर पड़ी। मन में गिद्ध सोचा, 'अहा! कितना अच्छा शिकार है। यदि यह हाथ लग जाए तो भोजन का मजा तो आएगा ही बच्चे भी खुश हो जाएंगे।'यह सोचकर उसने लपक-झपक कर लोमड़ी के बच्चे को पकड़ लिया और पंजों में दबोचकर उड़ चला अपने घोंसले की ओर। लोमड़ी का बच्चा जोर-जोर से चीखने लगा। उसकी चीख-पुकार सुनकर लोमडी वहां आई और अपने बच्चे को मौत के मुँह में देखकर रोने लगी। रोते-रोते वह गिद्ध के साथ-साथ भागती हुई गिड़गिड़ाई-“हे गिद्ध भाई! यह मेरा एक ही बच्चाहै, इसे छोड़ दो। दया करो इस मासूम पर। इसके अलावा मेरा कोई सहारा नहीं है। भइया, तुम तो पक्षियों के राजा हो। तुम्हें तो कोई दूसरा भोजन भी मिल जाएगा, मगर मेरे को कोई दूसरा बच्चा नहीं है। दया करो भइया, उसे छोड़ दो, मैं तुम्हारे पांव पड़ती हूँ।" । इस प्रकार रो-गिड़गिड़ाकर वह गिद्ध से अपने बच्चे के प्राणों की भीख मांगने लगी, पर गिद्ध तो गिद्ध था।

वह लोमड़ी के रोने कलपने पर जरा भी न पसीजा और उड़ता हुआ अपने घोंसले पर जा पहुँचा। लोमड़ी भी चीखती-चिल्लाती उस वृक्ष तक जा पहुंची। वह बराबर उससे विनती कर रही थी कि भइया मेरे बच्चे को छोड़ दो। मगर गिद्ध ने उसकी एक न सुनी और लोमड़ी के बच्चे को अपने बच्चों के सामने डाल दिया। गिद्ध के बच्चे उसे नोच-नोचकर खाने लगे। लोमड़ी का बच्चा चीख-चीखकर मर गया। जब उसकी चीखें शान्त हो गई तो लोमड़ी समझ गई कि उसका बच्चा मर चुका है और अब इस दुष्ट से फरियाद करने का कोई लाभ नहीं है। अब उसकी आँखों में खून उतर आया। वह बोली-“अरे दुष्ट! पापी! तूने एक मां का दिल दुखाया है, मैं तुझे इस करनी का ऐसा दण्ड दूंगी कि तू जब तक जिएगा, आँसू बहाएगा।"गिद्ध को अपने बल का बड़ा घमंड था। वह खिलखिलाकर हंसा और बोलामुझे क्या मजा चखाएगी, चल भाग यहाँ से। अगर मुझे गुस्सा आ गया तो।"

अब लोमडी ने इधर-उधर देखा, पास ही एक जगह आग जल रही थी। उसने जल्दी-जल्दी डधर-उधर से कुछ सूखी लकड़ियाँ बटोरकर पेड़ के नीचे रखी. फिर में से एक जलती हुई लकड़ी लाकर उन सूखी लकड़ियों पर रख दी। सखी ड़ियों ने देखते ही देखते आग पकड़ ली। आग आसमान को छूती हुई गिद्ध के घोंसले तक जाने लगी।अ. गिद्ध तो घबराकर उड़ गया, मगर उसके बच्चे अभी उड़ना नहीं जानते थे लिए वे आग में झुलस-झुलसकर धरती पर गिरने लगे और लोमड़ी एक-एक कर न्हें चट करने लगी।फिर गिद्ध से बोली-“अब तू भी अपने बच्चों के लिए उसी तरह रो जैसे मैं रोई , यही तेरी सजा है।" गिद्ध का अभिमान चूर-चूर हो गया। उसकी आँखों में आंसू आ गए। वह बोलाहन मैंने जैसा किया था, वैसा फल पाया। कहावत भी है, जैसी करनी, वैसी भरनी। ग! कि मैंने तुम्हें निर्बल समझकर तुम्हारी प्रार्थना सुनी होती।