हाथी में भगवान-दादी माँ की कहानी

Apr 06,2021 04:31 AM posted by Admin

एक आश्रम में एक ज्ञानी महात्मा अपने शिष्यों के साथ रहते थे। एक दिन अपने शिष्यों को उपदेश देते हुए उन्होंने बताया-"प्रत्येक प्राणी में भगवान है। स्त्री, पुरुष, पशु-पक्षी यहाँ तक कि छोटे-छोटे जीवों में भी भगवान विद्यमान है, इसलिए किसी से भी डरना नहीं चाहिए।"

महात्मा जी का उपदेश सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने उस मंत्र को रट लिया।एक दिन महात्मा जी का एक शिष्य आश्रम से नगर में गया। वह अपने ध्यान में मस्त होकर चला जा रहा था। सामने से एक पागल हाथी दौड़ा आ रहा था। उस पर बैठा महावत चिल्ला रहा था-"भागो-भागो, हाथी पागल हो गया है और मेरे वश में नहीं रहा, इसलिए भाग जाओ, अपने प्राणों को बचाओ।"
महावत ने पुनः चेतावनी दी-"हाथी पागल है, बचो।" महावत की चेतावनी पर ध्यान न देते हुए वह शिष्य हाथी के सामने अकड़कर खड़ा हो गया। हाथी को क्या मालूम था कि यह नया-नया ज्ञान सीखकर आया है। उसने अपनी सूंड में लपेटकर दूर फेंक दिया। शिष्य की हड्डियां टूट गई। जब एकदूसरे शिष्य ने महात्मा जी को खबर दी तो वहाँ आए और शिष्य को आश्रम में ले गए। गुरु जी ने शिष्य से पूछा-"क्या बात हुई ?"


वह बोला-"गुरुदेव! एक पागल हाथी भागा जा रहा था। मैं उससे बिल्कुल नहीं डरा क्योंकि आपका मंत्र मेरे पास था, परन्तु उस मूर्ख हाथी ने मुझे पूरे वेग से उठाकर फैंकदिया। आपके आदेशानुसार मैंने उसे भीभगवान का ही रूप समझा, लेकिन आपके भगवान ने मेरी हड्डियां तुड़वा दी। आपका मंत्र झूठा है।" गुरु जी सहज भाव से बोले-"क्या उस हाथी पर कोई सवार था ?" शिष्य ने बताया-"उस पर एक महावत बैठा था, जो कह रहा था कि हाथ पागल हो गया। अपने आपको बचाओ।" गुरु जी बोले-"तुम्हें हाथी पर सवार महावत में विराजमान भगवान की बात पहले सुननी चाहिए थी क्योंकि उसका भगवान हाथी के भगवान से अधिक जागृत था। तुम विवेक शून्य होकर केवल मेरे शब्दों को ही पकड़ पाए हो परन्तु उसमें विद्यमान रहस्य को नहीं समझ पाए।" शिष्य को अब यह रहस्य समझ में आ गया कि जिस प्राणी में चेतना अधिक जागृत होती है, उसी का भगवान अर्थात् ब्रह्म अधिक जागरूक होता है। इसलिए हमेशा ही इंसान को शब्द नहीं बल्कि उसमें छिपे रहस्य को समझना चाहिए। सदैव जागरूक रहना चाहिए और अक्ल से काम लेना चाहिए