गोनू झा की चालाकी-दादी माँ की कहानी

Apr 09,2021 01:40 AM posted by Admin

एक दिन गोनु झा खेत से काम करके घर आया। वह बहुत थका हुआ था। वह घर में खाना खाकर सोने चल दिया और थके होने के कारण उसे जल्द ही नींद आ गई। सुबह उठकर मुँह
धोकर खेत पर चला गया। गोनु को बहुत दिन से चैन नहीं मिली थी। गोनु के आज काम का अंतिम दिन था। गर्मी का समय था। जब शाम में गोनु झा खेत से आया और सोने के लिए चल दिया। उसे रात बारह बजे नींद खुल गई। वह वहाँ से भागा और नीचे गया। वहाँ से मच्छरदानी लेकर आ गया और उसे मटका कर सो गया। गोनु को अब नींद नहीं आ रही थी। इतने में उसे पेशाब भी लग गई। जब वह पेशाब करके आया तो अपने भाई के आँगन में फुस फुसाने की आवाज आई। गोनु ने सोचा कोई बात कर रहा होगा, फिर कान में भनक पड़ी, चुप रहो छत पे गोनु है। गोनु समझ गया कि आँगन में कोई चोर है। - गोनु ने सोचा अगर पकड़ने जाएँगे तो भाग जाएँगे वे नीचे जा कर अपनी पत्नी को सभी बात समझाया। गोनु तो जानते थे कि अपनी ही गांव का कोई आदमी हो सकता है। गोनु झा और उनकी पत्नी जोर-जोर से बातें करने लगे और चोर चुपके से सुनने लगा। गोनु ने कहा-प्रिये, तो अपने लोग सोनु के घर में चोरी पक्की।पत्नी बोली-स्वामी, चोरी तो कल पक्की लेकिन वे धन घर में नहीं रखत है।गोनु बोला-देखो प्रिये, मुझे तो सब मालूम है। पत्नी बोली-बोला । कहाँ ?

गोनु बोला-सोनू का आम का पेड़ है ना, उसका जो उत्तर दिशा से मोटा टहनीन है वही पर रखा है। सभी चोर तुरंत ही उस आम के पेड़ पर चढ़ गये और उत्तर दिशा का
मोटा टहनी था। वहीं पर मधुमक्खी का छता था। चोर समझा यहीं है धन।वे धन की लालच में तुरत हो सब उससे लिपट गया। तभी सारा मधमक्खी काटा कि जब पेड़ से गिरा। अब उसे चला तक न हुआ। गोन झा की पत्नी ने उसे रस्सी से बाँधा और पुलिस को बुलवाकर जेल में डलवा दिया।