गीदड़ की गवाही-दादी माँ की कहानी

Apr 07,2021 02:27 AM posted by Admin

एक राजा था। उसके एक पुत्र था। उसने अपने इकलौते पुत्र की शिक्षा का प्रबन्ध किया किन्तु उसका पुत्र व्यावहारिक दृष्टि से कुशल नहीं था।राजा ने एक दिन पुत्र को बुलाकर कहा-"जाओ, तुम देश भर में घूमकर आ ताकि तुम्हें दुनिया के बारे में जानकारी हो सके।" राजकुमार घोडे पर सवार होकर निकल पड़ा।

राजकुमार जंगल में जा रहा था कि एक जगह रास्ते में एक गीदड़ लेटा हुआ था।राजकुमार ने उससे कहा-"गीदड़ भाई, एक ओर हट जाओ ताकि मैं आगे जा सकूँ।" बीड ने कहा-"अरे भाई, मेरे आराम में क्यों खलल डालते हो, तुम्हीं एक तरफ होकर निकल जाओ।"राजकुमार को गुस्सा आया पर वह एक तरफ होकर निकल गया। चलते हुए कहा-"अब तो मैं जा रहा हूँ पर लौटते वक्त मैं तुम्हें देखंगा।"गीदड ने हंसते हुए जवाब दिया-यह तो वक्त ही बतायेगा कि कौन किसे देखेगा।राजकुमार चला गया। शाम हो गई। वह एक शहर में पहुँचा और एक तेली के घर के सामने रुक गया। राजकुमार ने अपना घोड़ा खूटी से बांध दिया। जबतेली बाहर निकला तो राजकुमार ने कहा-"भाई, मैं रात तुम्हारे घर में गुजार सकता हूँ क्या मुझे जगह मिलेगी?"तेली ने राजकुमार को सहर्ष ठहरा लिया। उसने राजकुमार की खूब खातिर की। राजकुमार रात को सो गया।


सुबह तेली ने राजकुमार को जगाकर कहा-"देखो मेरी धानी ने एक घोड़े को जन्म दिया है।"सुनते ही राजकुमार ने कहा-"नहीं भैया, यह घोड़ा तो मेरा है।" तेली ने कहा-“मगर जब तुम आए थे तो तुमने घोड़े का कोई जिक्र नहीं किया था। तुम्हारे पास घोड़ा कहाँ था ? यह घोड़ो तो मेरी धानी ने दिया है।"घोड़े को लेकर दोनों में झगड़ा हुआ और बात अदालत तक पहुँची। अदालत में तेली ने न्यायधीश के सामने हा कि घोड़ा मेरा है, मेरी धानी ने दिया है और इस बात की पुष्टि के लिए उसने अपने पड़ोसियों को प्रस्तुत किया।पड़ोसियों ने गवाही देते हुए कहा-"हमने देखा है कि तेली की धानी ने घोड़े कोजन्म दिया है।"न्यायधीश ने राजकुमार से पछा-"तुम्हारा भी कोई गवाह है जो यह कहे कि घोड़ा तुम्हारा है।मेरा ोत कोई गवाह नहीं है। गवाह के मैं कैसे मानं कि घोडा तम्हारा है ? फिर जरूर घोड़े को धानी ने पाला- जब मैं आ रहा था तो एक गीदड ने मझे देखा पैदा किया है।"राजकुमार कुछ सोचकर बोला।तब घोड़े पर सवार था।

राजकुमार गीदड़ के पास गया और उसने गीदड़ को सारी बात बताई। राज ने गीदड़ से चलकर गवाही देने की प्रार्थना की। गीदड़ ने कहा-"तुम जाओ अदालत में पहुँच जाऊँगा।"दूसरे दिन राजकुमार अदालत में पहुँचकर गीदड़ का इंतजार करने लगा। धीरेधीरे शाम होने लगी। अदालत का वक्त खत्म होने को था कि तभी गीदड़ अदालत में पहुँचा। वह राख में लिपटा हुआ था। न्यायधीश ने गीदड़ से पूछा-"तुम इतनी देर से क्यों आए ?"इस पर गीदड़ बोला-"क्या बताऊँ सरकार। मैं तो समय पर ही चल दिया था। रास्ते में एक नदी थी। मैंने देखा कि अचानक नदी में आग लग गई। बेचारी मछलियाँ जलने लगी तब नदी ने मुझसे प्रार्थना की, कि गीदड़ भाई, गीदड़ भाई, आग बुझाओ।"बस, मैं आग बुझाने में लग गया। देख लीजिए, मेरे सारे शरीर परराख लगी है। इसीलिए मुझे देर होगई।"न्यायधीश हंसकर बोला-"क्या खूब बहाना बनाया है ? भला नदी में आग कैसे लग सकती है ?"एक सम बेहद शौक इतने मस्त व कहानीकार "क्यों नही लग सकती सरकार ? जब धानी घोड़े को जन्म दे सकती है तो नदी में भी आग लग सकती है।" गीदड़ ने तत्काल उत्तर दिया।न्यायधीश को अपनी गलती का अहसास हो गया और उसने घोड़ा राजकुमार को दिलवा दिया।तेली को धोखाधड़ी से घोड़ा हथियाने की चेष्टा करने के लिए दण्ड दिया।