मूर्खता की मौत-दादी माँ की कहानी

Apr 08,2021 05:26 AM posted by Admin

एक जंगल में आमने-सामने दो पेड़ थे | एक पेड़ पर चिड़िया घौंसला बनाकर रहती थी दुसरे पर कोआ । कौआ स्वभाव से दुष्ट और मूर्ख भी था। वह अकसर दया को तंग किया करता था। वह जब दाना चुगने जाती, तो कौआ उसके घौंसले में घुसकर उसके अण्डे तोड़ जाता। बेचारी चिडिया रो कर रह जाती कमजोर होने के कारण कौए को न तो कुछ कह पाती, न उसका कछ बिगाड ही पाती। हमेशा सोचती रहती कि कौए को दुष्टता का मजा कैसे चखाया जाए ?बहुत सोचने के बाद आखिर चिड़िया को एक उपाय सूझ ही गया। उसने कौए के साथ मित्रता करने का निश्चय किया। एक शाम जब कौआ अपने पेड पर बैठा कांव-कांव कर रहा था, चिड़िया आकर उसके सामने बैठ गई। दो पल बाद बोली, "कौए भैया ! आज तो बड़ा सुन्दर गाना गा रहे हो। बड़ी मौज में हो। क्या बात है "कोई खास बात तो नहीं। बस यों ही मौज आ गई और गाने लगा।" कौए ने प्रशंसा से फूल कर कहा।इसी प्रकार अब रोज चिड़िया कौए की झूठी प्रशंसा कर देती, वह फूलकर कप्पा हो जाता। इस बातचीत का यह नतीजा भी निकला कि अब कौए ने चिडिया को सताना, उसके अण्डे तोड़ना बन्द कर दिया। अब वह घंटों चिड़िया के पास बैठ, उसके मुंह से अपनी झूठी प्रशंसा सुनता रहता।

एक दिन चिड़िया ने कहा, "कौए भैया, क्यों न हम अपनी मित्रता पक्की कर लें ?"वह कैसे ?' कौए ने पूछा।चिड़िया ने उत्तर दिया, "हम दोनों एक-दूसरे का अण्डा खा लें, इससे हमारी दोस्ती और भी पक्की हो जाएगी।"कौआ मान गया। उसने अपना अण्डा लाकर दिया। चिड़िया ने चोंच से फोड़ उसे खा लिया। फिर चिड़िया अपना एक अण्डा उठा लाई । कौआ जब उसे कोड़ने लगा तो उसे रोकते हुए चिड़िया ने कहा, "कौए भैया। तुम्हारी चोंच बहुत गन्दी हो रही है, पहले इसे पानी से धो आओ। फिर अण्डा खाना।"ठीक है धो आता हूँ।" कहकर कौआ उड़कर कुएं के पास गया और उसने पानी मांगा। कुआं बोला, "घड़ा ले आओ और मुझसे पानी निकाल लो।" . तब कौए ने कुम्हार के पास जाकर उससे घड़ा मांगा। कुम्हार ने कहा, "कहीं से मिट्टी ले आओ। घड़ा बना दूंगा।"कौया मिट्टी के टीले के पास जाकर उससे मिटटी मांगने लगा। तब टीले ने कहा, "किसी हिरण को बला लाओ. वह अपने सींगों से मिट्टी खोद देगा।" काए ने हिरण के पास पहंच उससे सहायता मांगी। वह बोला, "तुम तो जानते ही हो की मेरा स्वभाव बहत चंचल है। एक जगह खडा नहा रह सकता।

कोई कत्ता ले आओ। वह मेरे पैर पकडे रखेगा। मैं सींगों से मिट्टी खोद दूगा।"सनकर कौआ बडा हैरान परेशान हो उठा। उसे चिड़िया पर गुस्सा आनलगा। पर अब इतना दूर आ चुका था, इसलिए कर भी क्या सकता था। बिना चोंच धोए वापस जाना उसका अपमान था। सो खीझता हुआ एक कुत्ता का पता बात बताते हए बोला "कत्ते भैया! अब तम चलकर हिरण क पर पकड़ रखा, ताकि वह सींगों से मिटटी खोट दे। वह मिटी मैं कम्हार के पास लजाजता वह घडा बना दे। घडा लेकर कएं पर जाऊं, पानी खींचूं और चाच घाऊ उसका कहानी सुन कर कुत्ते ने कहा, "मैं बहुत कमजोर हूँ। चल नहीं सकता। पहले दूध पिला कर मेरी कमजोरी दर करो। तब मैं जाकर हिरण के पैर पकड रखंगा। वह सींगों से मिट्टी खोद देगा।" सुनकर कौआ दूध लेने गाय के पास पहुंचा। उसे सारी बात बताई और सहायता करने को कहा। गाय बोली, "पहले मुझे घास खिला दो, फिर मेरा दूध ले जाना।" कौआ खीझता हुआ घास के पास पहुंचा तो उसने कहा, “लौहार के पास से खुरपी ले आओ, मुझे (घास को) काट कर ले जाओ।"किस्मत का मारा कौआ, हार कर लोहार के पास पहुंच कर बोला, "लोहार भैया ! मुझे एक खुरपी बना दो, जिससे घास काट कर गाय को खिलाऊं।

वह दूध दे तो कुत्ते को पिलाऊं। कुत्ता हिरण की टांग पकड़े तो वह मिट्टी खोदे। मिट्टी ले जाकर कुम्हार को दूं तो वह घड़ा बना दे। उस घड़े से कुएं से पानी निकालूं। पानी से चोंच साफ कर चिड़िया का अण्डा खा सकूँ जिससे हमारी दोस्ती गहरी हो सके।"सारी बात सुन कर लोहार ने पूछा, "लाल खुरपी लोगे या काली।" कौए ने कहा, "लाल खुरपी ही लूंगा।"लोहार ने खुरपी आग में डाल दी। वह लाल होने लगी। जब लाल हो गई तो कौए से पूछा, "अब इसे ले कैसे जाओगे?"कौए से झट कहा, "अपनी चोंच से बांधकर।"उसकी बात सुन कर लोहार हंसा, फिर उसने जलते अंगारों में से खुरपी निकाल कर कौए की चोंच से बांध दी। जलती खरपी बांधने से कौआ तड़प कर मर गया। उसकी ओर देखकर लोहार ने कहा, "समझदार चिडिया ने दुष्ट आर मुर्ख को जा चखाने का कितना बढ़िया उपाय खोज निकाला। मर्खता की मौत एस ही होती है।"उसने मरे कौए को उठवा कर बाहर फिंकवा दिया। अब पेड पर चिड़िया व से रहने लगी।