भाई की उदारता-दादी माँ की कहानी

Apr 09,2021 03:14 AM posted by Admin

एक गांव में एक किसान रहता था। वह बड़ा समझदार और धर्मात्मा था। मेहनत से जो कुछ पैदा होता था, उसको अपना धन समझता था। किसान के दो पुत्र थे। बड़ा पुत्र बड़ा मेहनती था, खेती के काम-काज में अपने पिता की सहायता किया करता था। पर छोटा पुत्र बड़ा आलसी था। वह दिन भर पड़ा-पड़ा सोया करता था। किसान जब छोटे पुत्र को काम-काज में लगने को कहता, तो वह उसकी बात पर ध्यान नहीं देता था। उल्टे नाराज हो जाता था। घर छोड़कर कहीं चला न जाये, इसलिए किसान चुप रह जाता था।किसान जब साँसें तोड़ने लगा, तो उसने अपने दोनों पुत्रों में जमीन बराबरबराबर बाँट दी। उसने दम तोड़ते हुए अपने पुत्रों से कहा, "मैं तो जा रहा हूँ, पर एक सीख दे जा रहा हूँ कि मेहनत से कभी भी जी मत चुराना । मेहनत करते रहोगे तो जीवन का निर्वाह होता रहेगा।"बड़े पुत्र ने तो किसान की सीख पर ध्यान दिया पर छोटे पुत्र ने एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दी।किसान के मरने के बाद बड़ा पुत्र मेहनत से खेती करने लगा। वह न तो धूप देखता था, न बरसात देखता था और न जाड़ा देखता था, सदा खेती के काम में लगा रहता। पर छोटा पुत्र मेहनत से जी चुराता था।

वह या तो पड़ा-पड़ा सोया करता था या ताश और चौपड़ खेला करता था।दिन रात मेहनत करने के कारण बड़े पुत्र का धन बढ़ने लगा, पर मेहनत न करने के कारण छोटे पुत्र का धन दिनों-दिन घटने लगा। छोटे पुत्र को जब भी धन की जरूरत पड़ती थी, तो वह अपने हिस्से की जमीन बड़े भाई के पास गिरवी रखकर उससे रुपया ले लिया करता था।इस तरह छोटे भाई ने धीरे-धीरे अपने हिस्से की सारी जमीन बड़े भाई के पास गिरवी रख दी। जब गिरवी रखने के लिए कुछ नहीं रह गया, तो छोटा भाई अपने बाल-बच्चों को लेकर परदेश जाने लगा।बड़े भाई का हृदय प्रेम से उमड़ उठा। उसने छोटे भाई के पास जाकर उससे पूछा, "तुम बाप-दादों का घर छोड़कर कहां जा रहे हो?"छोटे भाई ने उत्तर दिया, "परदेश को छोड़कर अब और कहां जाऊंगा? यहाँ तो अब रोटी भी नहीं मिलती। मैं क्या करूँ?"

बड़ा भाई बोला, "देखो, मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूँ। बड़ा भाई पिता के ही समान होता है। इसलिए मेरी बात का बुरा मत मानना। पिता जी ने मुझे और तुम्हें बराबर जमीन दी थी। मैंने मेहनत से खेती की इसलिए मेरा धन बढ़ गया। पर तुमने सदा मेहनत से जी चुराया, इसलिए तुम्हारी जमीन तुम्हारे हाथ से निकल गई। बिना मेहनत के कुछ भी नहीं हो सकता। परदेश में भी बिना मेहनत किये हुए निर्वाह नहीं होगा मेरे भाई।"छोटा भाई सोचता हआ बोला, "पर अब हो क्या सकता है ? पहले पिता जी की सीख मान ली होती, तो ठीक होता, पर अब तो सारी जमीन हाथ से निकल चुकी है। अब मेहनत की सीख ग्रहण करने से क्या लाभ होगा?" बड़े भाई ने सोचते हुए कहा, "ऐसा क्यों कहते हो? मैं और तुम दोनों सगे भाई हैं। दोनों ने जन्म एक माता-पिता से लिया है। मेरे और तुम्हारे में कोई भी अन्तर नहीं है। मेरा धन तुम्हारा ही धन है। तुम्हारी जमीन किसी और के पास नहीं, मेरे ही पास है। तुम उसे ले लो। मेहनत से खेती करो। भगवान की दया होगी, तो फिर तुम्हारे दिन लौट आएंगे।"छोटे भाई ने बड़े भाई की छाती में अपना मुँह छिपा लिया। वह रोने लगा। बड़े भाई ने उसे गले से लगाते हुए, उसकी पीठ ठोंकते हुए कहा, "दुःखी मत हो, मेहनत करो, बस मेहनत करो।"बड़े भाई ने छोटे भाई को मेहनत करने के लिए प्रेरणा तो दी ही, उसकी सारी जमीन भी लौटा दी। दोनों भाई सुखी-सुखी रहने लगे।