भाग्य अपना-अपना-दादी माँ की कहानी

Apr 08,2021 07:01 AM posted by Admin

एक गाँव में राज बहादुर नाम का एक किसान रहता था। वह बहुत मेहनती था। उसके दो बेटे थे। बड़े का नाम नवल किशोर और छोटे का नाम राम किशोर था। राज बहादुर दिन रात खेतों में खूब मेहनत करता।धीरे-धीरे वह अमीर हो गया। समय बीतने के साथ-साथ अब उसके बेटे जवान हो गये थे। खेती का सारा काम अब उसके बेटे नक्ल किशोर और राम किशोर ने संभाल लिया। राज बहादुर बूढा हो गया। अब उसकी तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी। वह हर समय इसी चिंता में डूबा रहता कि यदि मुझे कुछ हो गया तो कहीं दोनों भाई सम्पत्ति के लिए आपस में न लडे। रामबहादुर ज्यादा पढ़ा-लिखा न था। उसे वसीयत के बारे में कुछ पता न था। आखिर उसने बंटवारे का एक उपाय सोचा। उसने एक रात खेत में दो घड़े गाड़ दिये। कुछ दिनों के बाद राज बहादुर की तबीयत ज्यादा खराब हो गई। अपनी मत्य का समय निकट जानकर उसने अपने दोनों बेटों को बुलाया और कहा-"मन खेत के दाएं कोने में दो घड़ों में धन गाड़ दिया है। मेरे मरने के बाद दोनों घड़े। निकाल लेना और जिसे जो मिले, उसी में ही संतोष करना।" कुछ दिनों बाद ही उसकीमृत्यु हो गई।

नवल किशोर और राम किशोर को जब अपने पिता की बात याद आई तो वह सखिया और कुछ अन्य लोगों को साथ लेकर खेत पर गये और खेत की खुदाई  करने लगे वहाँ उन्हें दो घड़े मिले। जिनके मुँह कपड़े से बंद थे। वर घडे खोलने लगे तो मुखिया ने उन्हें रोक दिया और कहा-"पहले दोनों एक घड़ा बाँट लो। उसके बाद ही इन्हें खोलना। पता नहीं, इन घडों में क्या इसलिए जो जिसके हिस्से में आए, ले लेना।" लोटे भाई राम किशोर ने कहा-"भैया पहले आप अपने लिए घड़ा चुन लें,क्योंकि आप बड़े हैं।"सबने उनकी बात का समर्थन किया।मगर नवल किशोर ने कहा कि नहीं भाई। पहले तुम अपना घड़ा चुनों तुम छोटे हो, इसलिए पहला हक तुम्हारा है। । लेकिन छोटा भाई राम किशोर नहीं माना।

तब नवल किशोर ने एक घड़ा उठा लिया।दूसरा घड़ा राम किशोर ने ले लिया। अब नवल किशोर ने अपना घड़ा खोला। उसमें सोना तथा जेवरात थे। वह खुशी से उछल पड़ा। राम किशोर ने अपना घड़ा खोला। उसमें मिट्टी निकली। यह देखकर वह उदास हो गया। नवल किशोर खुशी से नाचते हुए बोला-"पिता जी मुझे प्यार करते थे। इसलिए मुझे सोना तथा जेवरात मिले।"राम किशोर चुप खड़ा था। उसकी समझ में नहीं आया कि पिता ने एक घड़े में मिट्टी क्यों रखी ?उसे लगा कि इसमें जरूर कोई रहस्य छिपा है। उसने लोगों से पूछा लेकिन किसी की समझ में कुछ नहीं आया। मुखिया ने कहा-तुम इस घड़े को लेकर राजा के पास जाओ और उनसे पूछो। वे अवश्य ही इस पहेली को सुलझा देंगे।कई लोगों को साथ लेकर राम किशोर दरबार में पहुँचा। उसने महाराज को पूरी बात बताई और अपना घड़ा भी दिखाया। पहल तो महाराज सोच में पड़ गया। फिर कुछ सोचकर हंसने लगे और यह तो बड़ी ही साधारण बात है। तुम्हारे पिता ने घड़े में मिट्टी इसलिए " जिसक पास मिट्टी वाला घडा आएगा. वही जमीन का मालिक होगा।"जाक निर्णय की सराहना करने लगे। अब राम किशोर को मिट्टी से भर घड़े से कोई शिकायत नहीं थी।