बैल बड़ा या शेर-दादी माँ की कहानी

Apr 07,2021 07:40 AM posted by Admin

मथुरा के पास यमुना के किनारे एक घना जंगल था। जंगल इतना घना होने के कारण वहाँ बहुत सारे जानवर रहते थे। जानवरों का राजा एक शेर था जो बहुत ही था। उसके दो मंत्री सियार थे। दोनों को सलाह-मशवरा करके ही राजा अपना राज चलाता था। गल जहाँ समाप्त होता था उसके पास ही बड़ा रास्ता ता। मथुरा और दूसरे बड़े हो जाने का सिर्फ यही एक रास्ता था। सारे छोटे-बड़े काफिले इस रास्ते से ही होकर जाते थे। कबार बरसात के दिनों में एक काफिला वहाँ से गुजर रहा था। एकव्यापारी की गाडी में उसका ताकतवर और सन्दर बैल जुता था। दलदली मिट्टी में बैल का पैर अचानक फंस गया। बहुत कोशिशों के बाद भी व्यापारी और उसके साथी उसका पैर न निकाल पाये। खींचातानी से हुई पीड़ा के कारण बैल बेजान हो गया। उसे मरा समझकर व्यापारी दुखी मन से उसे वहीं छोड़ अपने काफिले के साथ आगे बढ़ गया। बेहोश बैल जब होश में आया तो उसे अपने आस-पास कोई दिखाई नहीं दिया। वह खुद ही जोर लगाकर दलदली मिट्टी से निकला और जंगल की ओर बढ़ चला। वहाँ खाने को खूब खास व पत्ते थे। पीने को पास हीयमुना का ठंडा व मीठा पानी था।कुछ ही दिनों वह स्वस्त हो गया।

उसका डील-डौल निखर आया। मन की मौज में आकर जब वह डकारता तो आस-पास के सभी जानवर डरकर भाग जाते। जंगल के किनारे बैल के आ बसने की बात शेर को पता न थी। कई दिनों के बाद शेर की इच्छा हुई कि यमुना का ठंडा व मीठा पानी पिया जाये। वह यमुना की ओर चल दिया। तट पर पहुँचने से पहले ही उसे बैल का गम्भीर नाद सुनाई पड़ा। यह कैसी गर्जना है ? कैसा स्वर है ?मन ही मन उसने सोचा शायद मुझसे भी अधिक ताकतवर दूसरा शेर यहाँ आकर बस गया है। वह पानी पिये बिना ही अपनी मांद में लौट गया। शेर का उदास मुंह और ढीली चाल को देख उसके मंत्री चिंचित हुए।पारने दूसरे से कहा-"लगता है. महाराज बिना पानी पिये ही लौट आये हैं। हा क्या कारण है ? हमें जान लेना चाहिए।" दूसरा सियार बोला-"यह हमारा काम नहीं है। दूसरों के मामले में पड़ना सियार ने दूसरे से कहा-"लग इस पर दूसरा सियार बोलाबेवकूफी है।"