ऐसा था तेनाली राम-दादी माँ की कहानी

Apr 07,2021 06:32 AM posted by Admin

तेनाली राम विजय नगर के राजा कृष्ण देवराय के दरबार में विदूषक था। महाराज का मित्र भी था और सलाहकार भी। एक दिन महाराज ने किसी बात पर नाराज होकर उसे देश निकाला दे दिया। तेनाली राम भीरूठकर चला गया।जब तेनाली राम कई दिनों तक वापस नहीं लौटा तो महाराज को चिंता हुई और उन्होंने उसे खोजने के लिए इधर-उधर दूत भेजे, मगर सभी निराश होकर लौट आए। अब तो महाराज और अधिक चिंतित हुए कि आखिर तेनाली राम चला कहां गया ?तब काफी सोच-विचार के बाद उन्हें एक तरकीब सूझी। उन्होंने उसी दिन अपन राज्य के हर शहर और देहातों में घोषणा करवा दी कि महाराज अपने शाही कुएं का विवाह करा रहे हैं। अत: सभी गांवों के मुखियों को आदेश दिया जाता है कि सभी अपने कओं को लेकर राजधानी पहुंचे। इस आज्ञा का उल्लंघन करने पर दस स्वर्ण मुद्राएं दण्ड स्वरूप वसूली जाएंगी। जिसने भी यह आदेश सुना, दंग रह गया। कहीं कुए भी कहीं लाए-लेजाए जा सकते हैं ?"कुओं की भी भला कहीं शादी होती है ?" "लगता है, महाराज सठिया गए हैं।" लोगों में इसी प्रकार की बातें होने लगी।उधर तेनाली राम एक गांव में जाकर ठहर गया था।

उस गांव में भी यह खबर फैल गई। उस गांव के मुखिया भी परेशान थे कि आखिर कुएं को राजधानी कैसे लेकर जाएं ? वे कुछ लोगों के साथ बैठे विचार-विमर्श कर रहे थे।तेनाली राम समझ गया कि महाराज ने उसे खोजने के लिए ही यह चाल चली है। अतः वह स्वयं मुखिया के पास गया और बोला-"आप चिंता न करें। आपने अपने गांव में प्रस्तय देकर मुझ पर उपकार किया है, इस उपकार का बदला मैं अवश्य चकाऊँगा। मैं आपको एक तरकीब बताता हूँ। आप राजधानी जाने की तैयारी कीजिए।"तत्पश्चात् तेनाली राम ने उन्हें तरकीब बता दी।मुखिया चार-पांच आदमियों को साथ लेकर राजधानी आ पहुंचा। राजधानी के बाहर सभी ने डेरा डाला। मुखिया के आदेश पर एक आदमी राज दरबार में पहुंचकर बोला-"महाराज! हमारे गाँव के कुएं आपके कुएं की शादी में शामिल होने आए हैं।""कहां है ?" महाराज चौंके।"राजदानी के बाहर रुके हुए हैं। उनका कहना है कि आप अपने कुओं को उनके स्वागत के लिए भेजें।"यह सुनते ही महाराज समझ गए कि इस बात के पीछे तेनाली राम का दिमागहै। उन्होंने तुरन्त उन ग्रामीणों से पूछा-"सच-सच बताओ कि यह बात तुम्हें किसने सुझाई गांव वालों ने बता दिया। तब महाराज स्वयं उस गांव में पहुंचे और तेनाली राम को सम्मान सहित वापस कर आए। इतना ही नहीं जिस गांव के मखिया ने उन्हें आश्रय दिया था, उसे भी बहुत सा ईनाम दिया गया तथा ग्रामीणों में भी पुरस्कार आदि बंटवाकर अनुग्रहित किया।