तोते की समाधि-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 10,2021 03:57 AM posted by Admin

एक स्थान पर एक व्यक्ति को तोते पालने का बड़ा शौक था। वह तोतों को अच्छी तरह पढ़ाता-सिखाता था। जब तोता खब बोला तो वह उस तोते को शहर के प्रतिष्ठित और शौकीनों को ले जा दिया करता था, जिससे उसके परिवार का जीवन-बसर हो जाया था।इत्तफाक से एक बार उस शिकारी व्यक्ति को एक अच्छा तोता मिल गया। उसने उसे खूब बोलना सिखाया और उसके पश्चात् तोता बादशाह को भेंट कर दिया। बादशाह को तोता पसन्द आया। सबसे अच्छी बात उन्हें यह जची कि वह सवाल का जवाब भी देता था। बादशाह ने उसकी हिफाजत का प्रबन्ध एक विश्वासपात्र नौकर को सौंपा। उसे आज्ञा दी कि इसके स्वभाव में किसी किस्म का ऐब न आए। यदि किसी के द्वारा मुझे इसकी मृत्यु का समाचार ज्ञात हुआ तो उसे फांसी की सज़ा दे दी जाएगी।बादशाह का आदेश पाते ही नौकर ने तोते को काफी सुरक्षित स्थान पर रखा। अकस्मात् तोता चल बसा। नौकर को जब यह पता चला तो बीरबल के पास गया और सारा विवरण बता दिया। नौकर ने कहा-"अगर बादशाह के पास तोते के मरने की खबर ले जाता हूं तो प्राण दण्ड मिलेगा। यदि खबर नहीं देता तो भी मौत मिलेगी, इसलिए किसी उपाय से मेरी जान बचाइए।"


बीरबल बोले-"तुम्हें किसी किस्म की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। जाओ अपना काम करो।" नौकर से इतना कहकर बीरबल बादशाह के पास गए और बड़बड़ाते हुए कहा-"आपका तोता तो।" बादशाह इसका मतलब नहीं समझ सके और बोले-"बीरबल! क्या बड़बड़ा रहे हो? क्या तोता मर गया?"बीरबल बोला-"जहांपनाह! मरा नहीं, मैं तो यह कहने आया हूं कि तोते ने समाधि ले ली है। आज प्रात:काल से न तो खाया, न पिया, न पंख हिलाता है, न सिर ऊपर उठाता है। न तो उसने अपनी आंखें खोला, न कुछ बोला है।"बादशाह यह सुनकर बहुत आश्चर्यचकित हुए और उस स्थान की और बढे, जहां तोता रहता था। वहां जाकर उन्होंने देखा कि तोते के प्राण पंखेरू उड़ गए हैं। तब बादशाह ने बीरबल से कहा-"तुमने मुझको क्यों परेशान किया? सिर्फ यह कह देना था कि तोता मर गया है।"बीरबल ने नम्रतापूर्वक उत्तर दिया-"आपका कथन यथार्थ है, परन्तु यदि मैंने ऐसा कह दिया होता तो व्यर्थ जीवन गंवाना पड़ता।" बादशाह को अब अपनी प्रतिज्ञा याद आई। वह बीरबल से बहुत खुश हुए। इस तरह अपनी बुद्धिमत्ता से बीरबल ने तोते के रखवाले नौकर के प्राण बचाए और उचित इनाम भी पाया।