ठग औरत-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 10,2021 01:02 AM posted by Admin

एक बार की बात है कि बादशाह अकबर के दरबार में एक अजीब मामला पेश हुआ। भरी सभा में एक औरत एक आदमी को साथ लेकर आई और बोली-"हुजूर! इस आदमी ने मेरे सारे जेवर छीन लिए हैं।"
अकबर बादशाह ने उस आदमी से इसका कारण पूछा तो वह हाथ जोड़कर बोला-"जहांपनाह! मैं परदेसी आदमी दिल्ली शहर देखने आया था। रास्ते में मुझे यह औरत मिली और आपसे भेंट कराने का वादा किया। आपके दर्शन की लालसा लिए मैं इसके पीछे-पीछे चला आया। मैं बिल्कुल सच कह रहा हूं हुजूर! मैंने इसके कोई जेवरात नहीं छीने हैं।"


तब वह औरत बोली-"आलीजहां! यह आदमी बिल्कुल झूठ बोल रहा है। मेरे सारे जेवर छीनकर अब यह ईमानदार बन रहा है।"अकबर बादशाह दोनों की बातों से कोई नतीजा नहीं निकाल सके कि वास्तव में दोषी कौन है? अन्य दरबारी भी दोनों की बातें सुनकर किसी के पक्ष या विपक्ष में राय कायम नहीं कर सके। अन्त में अकबर बादशाह ने बीरबल को इस फैसले का भार सौंप दिया। बीरबल ने औरत से पूछा-"तेरे जेवर कितने रुपए के थे?"करीब पांच हज़ार रुपए के।" उस औरत ने रोने वाले अन्दाज़ में कहा।बीरबल ने उस औरत की शक्ल देखी और समझ लिया कि इस औरत के पास इतने रुपए के जेवर नहीं हो सकते हैं। यह तो बेगुनाह परदेसी को लटना चाहती है। कुछ सोचकर उन्होंने सरकारी खजाने से पांच हज़ार रुपए मंगवाए और गुप्त रूप से एक सिपाही को देकर कहा-“यह रुपए उस परदेसी को दे दो और उसे समझा दो कि बीरबल का हुक्म पाते ही वह रुपए औरत को दे दे।" सिपाही ने उस आदमी को समझाकर रुपए दे दिए। अब बीरबल उस परदेसी से बोले-"तुमने इसके जेवरात छीने हैं। औरत कभी झूठ नहीं बोल सकती। इसलिए तुम अभी इसे या तो इस जेवरात वापस कर दो या पांच हजार रुपए दे दो, फिर तुम छोड दिए जाओगे, नहीं तो जेल की हवा खानी पड़ेगी।"


उस परदेसी ने उस औरत को सभी के सामने पांच हजार रुपए दे दिए। औरत रुपए लेकर खुश होती हुई घर की ओर चल पड़ी। वह कोई एक फलांग ही गई होगी कि बीरबल ने उस परदेसी से कहा
"जाओ और उसके सारे रुपए छीन लाओ, रुपए लेकर ही लौटना।"परदेसी बीरबल की आज्ञा पाकर दौड़ गया और उस औरत से रुपए छीनने का उसने बहुत प्रयत्न किया, लेकिन वह औरत भी अड़ गई। किसी भी प्रकार उसने रुपया नहीं छोड़ा और उसका हाथ पकड़कर बोली-"चल, जहां से रुपया मिला है, वहीं चलकर तुझे दे दूंगी।" गुप्तचरों ने उस औरत व आदमी के आने से पहले ही सारा हाल कह सुनाया। इस बात से बीरबल को और भी विश्वास हो गया कि निस्संदेह यह औरत धोखेबाज है। थोड़ी देर के बाद उस आदमी को साथ लिए औरत सभा में उपस्थित हुई और बोली-"जहांपनाह! जो रुपया आपने मुझको दिलवाया है, उन रुपयों को अभी यह आदमी रास्ते में मुझसे छीन रहा था। मैंने इसकी एक नहीं चलने दी और आपके सम्मुख इसे ले आई तब बीरबल ने उस औरत से पूछा-"यह तुमसे रुपया छीन पाया या "नहीं?"इसने कोशिश तो बहुत की, पर मुझसे नहीं छीन पाया।" औरत ने विजयी भाव से कहा।बीरबल ने डांटकर उस औरत से कहा-"जो आदमी तुमसे रुपया छीनने की ताकत नहीं रखता, उसके द्वारा जेवरातों का छीना जाना कैसे मुनकिन है? तू झूठी है, रुपए अभी वापस कर।" अब बीरबल ने बेंत से उस औरत को पीटने की आज्ञा दी। मार खाने के डर से औरत ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और रुपए वापस दे दिए। बाद में बीरबल ने उस औरत को जेलखाने भिजवा दिया तथा उस परदेसी को बाइज्ज़त विदा कर दिया। बीरबल के न्याय की बादशाह सहित दरबारी भी तारीफ किए बिना न रह सके।