थैली का फैसला-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 10,2021 03:40 AM posted by Admin

एक बार बादशाह अकबर दरबार में बैठे हुए थे। ठीक उसी समय एक तेली तथा कसाई परस्पर लड़ते-झगड़ते हुए आए। बीरबल ने पूछा-"तुस दोनों में से शिकायत कौन लेकर आया है?" तेली ने कहा-"हुजूर! मैं वादी हूं।" कसाई ने कहा-"मैं प्रतिवादी हूं हुजूर! बीरबल ने उन दोनों से लड़ाई का कारण पूछा। इस पर तेली ने कहा-"ग़रीब परवर! मैं अपनी दुकान पर बैठा हुआ हिसाब लिख रहा था कि इतने में इस कसाई ने मेरे पास आकर तेल मांगा।अपना काम छोड़कर मैंने इसे तेल दे दिया तथा..फिर से मैं अपने काम में जुट गया। थोड़ी देर के बाद क्या देखता हूं कि पैसों की थैली नहीं। मुझे इस कसाई पर शक हुआ, अतः मैं उसी वक्त दौड़ता हुआ इसके बास गया और इसके हाथ में वह थैली देखी, लेकिन जब मैंने इससे थैली मांगी तो इसने देने से इंकार कर दिया और कहा कि यह तो मेरी है। मैं बिल्कुल सत्य कह रहा हूं, हुजूर, यदि इसमें तनिक भी झूठ हो तो ऊपर वाला साक्षी है, वह जानता है। आप अब इंसाफ करके मेरी थैली मुझे दिलवा दीजिए।"जब तेली अपना हाल सुना चुका, तो कसाई कहने लगा-"हुजूर! मैं अपनी दुकान पर बैठा हुआ बिक्री के पैसे गिन रहा था कि इतने में ही यह तेली रोज़ की तरह तेल बेचने आया। इसकी दुकान मेरी दुकान से चार-पांच घरों के फासले पर है। यह जिस वक्त मेरे पास आया, उस वक्त पैसों की थैली मेरे पास रखी हुई थी। इसके जाते ही मैंने देखा ता थैली नहीं मिली। मैंने दौड़कर इसे पकड़ लिया और अपनी थैली इसस छीन ली।"


इतना कहने के बाद कसाई बोला-"मैंने अपनी सारी बात सच्ची-सच्ची कही है, यदि इसमें तनिक भी झूठ बोला हो, तो खुदा की कसम हुजूर! आप ही हमारा इंसाफ करें।"दोनों की बात सुनकर बीरबल ने उन्हें दूसरे दिन आने का हक्म दिया और पैसों की थैली अपने पास रहने दी। उनके चले जाने के बाद बीरबल ने उस थैली में से पैसे निकालकर धुलवाए, तो उनमें तेल का अंश बिल्कुल भी दिखाई न दिया, बल्कि एक प्रकार की बदब आई, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि ये पैसे कसाई के हैं।ठीक समय पर कसाई एवं तेली दोनों आ गए। बीरबल ने उन्हें अपना फैसला बता दिया, तो तेली चीखने-पुकारने लगा, लेकिन जब बीरबल ने उसे कोड़े लगाने का हुक्म दिया, तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।पैसों की थैली कसाई को सौंप दी गई और तेली को उपयुक्त सज़ा दिए जाने का हुक्म दिया गया।