सौ गायों को मारना, जिलाना आपके हाथ है-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 09,2021 06:10 AM posted by Admin

एक बार तानसेन और बीरबल में विवाद हो गया, होते-होते दरबार में उनके दो पक्ष बन गये। एक बीरबल को श्रेष्ठ कहता और दूसरा तानसेन को। आखिरकार यह बात बादशाह के कानों तक पहुंची, वह भी इसका फैसला न कर सके। अन्त में उन्होंने यही कहा कि तुम दोनों लोग महाराणा उदयपुर के पास जाओ और उनसे ही फैसला कराओ। वे जिसे भी. श्रेष्ठ कहेंगे, मैं उसे ही मान लूंगा। दोनों ही उदयपुर चल दिये। । महाराणा उदयपुर के दरबार में तानसेन ने तो पहले ही अपना गाना आरम्भ कर दिया था। उसके गाने का इतना प्रभाव पड़ा कि सारा दरबार वाह-वाह करने लगा और महाराणा भी उसकी प्रशंसा करने लगे। जब बीरबल ने देखा तो उसने सोचा कि तानसेन तो मैदान मार ले जायेगा। इसलिए कोई तरकीब करनी चाहिए। यह सोचकर बीरबल ने तुरन्त ही महाराणा से कहा-अन्नदाता, जब मैं और मियां तानसेन अजमेर पहुंचे तो मैंने पुष्कर जी से यह कहा था कि यदि मैं महाराणा साहब के यहां से जीत गया तो मैं सौ गाय पुण्य करूँगा।


और तानसेन ने यह प्रतिज्ञा की थी कि यदि वह जीत गया तो दरगाह साहब पर सौ गायों की कुर्बानी करेगा। इसलिए अब सौ गायों को मारना जिलाना आप ही के हाथ में है, चाहे बचाइये या मरवाइये।
यह सुनते ही महाराणा का दिमाग एकदम पलट गया, उन्होंने जल्दा ही कहा कि बीरबल तानसेन से अधिक अक्लमंद है। बेचारा तानसेन चिल्लाता ही रह गया कि हम लोगों ने ऐसी कोई प्रतिज्ञा नहीं की थी।
जब उदयपुर से विजय होकर बीरबल दिल्ली पहुंचा और बादशाह से सारा हाल कहा तो वह भी उसकी बुद्धिमानी पर बहुत खुश हुए और कहा कि महाराणा साहब बहुत चतुर हैं।