शराब पीना छोड़ दिया-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 10,2021 04:07 AM posted by Admin

अकबर वैसे तो शराब नहीं पीते थे, परन्तु जब शाम को उन्हें थकान महसूस होने लगती थी तो रात के समय थकान दूर करने के लिए थोड़ीबहत शराब पी लिया करते थे, लेकिन वह ऐसा छिपकर करते थे, फिर भी उनके बातचीत के ढंग से बीरबल को यह पता लग ही गया। बीरबल ने बादशाह की इस बुरी आदत को छुड़ाने का निश्चय किया। बादशाह जिस कमरे में शराब रखते थे, एक दिन बीरबल उसमें गुप्त रूप से गए और वहां की हर एक वस्तु को ध्यान से देखा। बाद में वहां की चीजें अस्त-व्यस्त करके बीरबल ने शराब की बोतल अपने दुशाले में छिपा ली और बादशाह के सामने ही तेज़ी से निकल गए। बगल में कोई चीज़ छिपाकर तेजी से बीरबल को ले जाते देखकर बादशाह को सन्देह तो हुआ, किन्तु उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। उनके जाने के थोड़ी देर बाद ही उन्होंने बीरबल को बुलवाया। बीरबल बगल में वही पोटली दबाए हुए बादशाह के सामने हाज़िर हुए। अकबर ने पूछ ही लिया-"बीरबल! तुम्हारी बगल में क्या है?"बीरबल ने जवाब दिया-"जहांपनाह ! कुछ भी नहीं है।" उन्होंने दोबारा पूछा तो बीरबल बोले-"तोता है।" इस जवाब को सुनकर बादशाह को गुस्सा आने लगा। वह क्रोधित स्वर में बोले-"सच-सच क्यों नहीं बताते क्या है?" बीरबल ने अपने स्वभाव के तरीके से जवाब दिया-"घोड़ा बादशाह को ताज्जुब हुआ, वह झुंझलाकर बोले-"आज तुमको क्या हो गया है, जो ऐसी बे सिर-पैर की बातें कर रहे हो, ठीक क्यों नहीं बताते?" इस बार बीरबल ने कहा-"हाथी है।"बादशाह बहुत नाखुश हुए और उन्होंने चिल्लाकर कहा-"क्या आज तुम्हारी मौत नज़दीक आ गई है?" यह सुनकर बीरबल बोले-"गधा है।" फिर बादशाह ने सरल भाव से पूछा तो बीरबल ने सच कह दिया-"शराब है।" और बोतल निकाल कर रख दी।बीरबल के हाथ में शराब की बोतल देखकर बादशाह हैरान रह गए। बादशाह के दिल में यह बात समा गई थी कि बीरबल आज होश में नहीं है। अवश्य ही उसने शराब पी है।

शाम को जब नवरत्न बैठे तो बीरबल भी उन्हीं में आ बैठे। बादशाह ने इन्हें देखा और पूछा-"तबीयत कैसी है?" बीरबल बोले-"मेरी तबीयतखराब कब थी?" यह सुनकर बादशाह बोले-"यदि खराब नहीं। क्यों शराब की बोतल बगल में दबाकर हमारे पूछने पर बे-सिर पर जवाब दे रहे थे?"बीरबल ने यह अच्छा मौका हाथ आया देखकर कहा-"जहांपना। पहले जब आपने मुझसे पूछा कि बगल में क्या है। तो मैंने जवाब दिया कि कुछ नहीं। यह बात सच है कि शराब का पहला प्याला पी जाने पर आदमी को कुछ भी नहीं मालूम होता है। दूसरा प्याला पीते ही उसकी जबान तुतलाने लगती है, इसलिए मैंने आपके प्रश्न के उत्तर में कहातोता है। फिर शराब का तीसरा प्याला पीते ही शराबी घोड़े की तरह हिनहिनाने लगता है, तभी मैंने आपसे तीसरी बार पूछने पर कहा था कि घोड़ा है। उसके बाद चौथा प्याला पीते ही उसकी दशा मस्त हाथी जैसी हो जाती है, इसलिए मैंने कहा कि हाथी है। उसके बाद पांचवां प्याला पी लेने पर वह गधे के जैसा हो जाता है उसके ऊपर बोझा लाद दो और चाहे जहां लेकर चल दो। इसलिए मैंने गधा कहा था। अब रहा छठा प्याला, इसे पीते ही मनुष्य अपनी सारी चेतना खो बैठता है, इसीलिए आखिर में मैंने बोतल हुजूर के सामने रख दी।" यह सुनकर बादशाह अकबर बड़े प्रसन्न हुए।उसी वक्त उन्हें शराब पीने की तलब महसूस हुई, क्योंकि यही वक्त उनके रोज़ पीने का था। जैसे ही वह अपने उस कक्ष में गए, उन्होंने देखा कि वहां की सारी चीजें इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं और शराब की बोतल भी वहां से गायब है। बादशाह समझ गए कि बीरबल को यह बात मालूम हो गई है। उसी दिन से बादशाह ने शराब पीना छोड़ दिया। इस प्रकार बीरबल ने अकबर बादशाह की शराब पीने की आदत छुड़वा दी।