सबसे बड़ी चीज़-गर्ज़-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 10,2021 12:52 AM posted by Admin

अकबर काफी विनोदी स्वभाव के थे। वह अक्सर ऐसी बातों में आनन्द लिया करते थे, जिनका जबाव विद्वान-से-विद्वान व्यक्ति भी देने से झिझकता था। अकबर को पहेलियां बुझाने का भी बहत शौक था। अकबर की अधिकतर पहेलियों का उत्तर बीरबल ही दिया करते थे। यूं कहिए कि बीरबल ही अकबर की पहेलियों का उत्तर दे पाते थे. इसलिए अकबर बादशाह उनसे बहुत प्रसन्न रहते थे। परिणामस्वरूप अन्य दरबारी बीरबल से ईर्ष्या रखते थे। एक दिन की बात है कि बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं थे। ऐसे में सभी सभासदस्य बीरबल के खिलाफ अकबर के कान भर रहे थे। उनकी बुराई कर रहे थे। अकबर बादशाह को यह सब अच्छा नहीं लग रहा था, क्योंकि वह बीरबल को दिल से प्यार करते थे। इसलिए बादशाह ने अपने दरबारियों से कहा-"तुम लोग खाममख्वाह बीरबल की बुराइयों कर रहे हो। वास्तव में बीरबल तुम लोगों से काफी चतुर व बुद्धिमान है।"


दरबारी बोले-"बादशाह सलामत! आप वास्तव में बीरबल को आवश्यकता से अधिक आदर देते हैं। हम लोगों से ज्यादा उन्हें प्यार करते हैं। आपने एक हिन्दू को सिर चढ़ा रखा है।"सभा समाप्त होने के समय अकबर बादशाह ने अपने उन चार दरबारियों से कहा-"देखो, आज बीरबल तो यहां है नहीं और मुझे अपने एक सवाल का जवाब चाहिए। यदि तुम लोगों ने मेरे प्रश्न का सही-सही उत्तर नहीं दिया तो मैं तुम चारों को फांसी पर चढ़वा दूंगा।" बादशाह की बात सुनकर वे चारों घबरा गए।उनमें से एक ने हिम्मत करके कहा-"प्रश्न बताइए बादशाह सलामत!" "संसार में सबसे बड़ी चीज़ क्या है?" बादशाह ने सवाल किया।अकबर का प्रश्न सुनकर चारों चुप हो गए। इस सवाल का उन्हें कोई उत्तर नहीं सूझ रहा था। कुछ देर बाद उनमें से एक ने कहा-"खुदा की खुदाई सबसे बड़ी चीज़ है।"
"बादशाह सलामत की सल्तनत सबसे बड़ी है।" दूसरे ने जवाब दिया।तब उनके बेतुके उत्तर सुनकर बादशाह ने कहा-"अच्छी तरह सोचसमझकर उत्तर दो, वरना मैं कह चुका हूं कि तुम लोगों को फांसी पर


चढवा दिया जाएगा।" "बादशाह सलामत! हमें कुछ दिनों की मोहलत दी जाए।" तीसरे ने भयभीत स्वर में कहा।"मुझे कोई एतराज नहीं है। मैं तुम लोगों को एक सप्ताह देता हं," बादशाह ने कहा। वे चारों सभा से मुंह लटकाए बाहर आए। फांसी के नाम पर उनके चेहरों पर मुर्दनी छा गई थी।  छः दिन बीत गए लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं सूझ सका। हार कर उन चारों ने आपस में सलाह की कि इस प्रश्न का उत्तर केवल बीरबल ही बता सकता है, इस परेशानी से हमें वही उबार सकता है। यह निश्चय करके वे चारों बीरबल के पास पहुंच गए। उन्होंने बीरबल को पूरी घटना कह सुनाई और हाथ जोड़कर उनसे विनती की कि वह उनके प्रश्न का उत्तर बता दें।


बीरबल ने उनका प्रश्न सुनकर मुस्कराते हुए कहा-"मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दे दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है।" . "हमें आपकी हज़ार शर्ते मंजूर हैं। बताइए क्या शर्त है?"तुम अपने कन्धों पर मेरी चारपाई रखकर सभा-महल तक ले चलोगे। सके साथ ही तुम में से एक मेरा हुक्का पकड़ेगा, जिसे मैं पीता हुआ चलूंगा। एक मेरे जूते लेकर चलेगा।" बीरबल ने, अपनी शर्ते बताते हुए कहा। अगर किसी और समय बीरबल उनको यह सब करने के लिए कहते तो शायद वे इस शर्त को कभी नहीं मानते, लेकिन अब जब उन्हें फांसी लगने का डर था तो वे तुरन्त ही उनकी बात मानने को तैयार हो गए। उन्होंने वैसा ही किया। वे चारों अपने कन्धों पर बीरबल की चारपाई उठाए, उनका हुक्का और जूते लेकर चल दिए। बीरबल हुक्का पीता हुआ चला जा रहा था। रास्ते में लोग आश्चर्य से इस अजीब दृश्य को देख रहे थे। उन्होंने जाकर बीरबल ने चारपाई से उतरकर कहा-"बादशाह सलामत! आपको अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा। संसार में सबसे बड़ी चीज़ है 'गर्ज'।"अकबर बादशाह मुस्करा उठे। वह इन चारों सभासदों को सबक सिखाना चाहते थे। दरबारी मुंह लटकाए खड़े रहे।