टेढ़ी गर्दन-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 09,2021 05:50 AM posted by Admin

एक समय अकबर ने बीरबल की चतुराई तथा हाज़िरजवाबी से प्रसन्न होकर उसे सौ एकड़ भूमि इनाम में देने की घोषणा की। यह घोषणा करने, के पश्चात् वह इसके बारे में पूरी तरह भूल गए।
इसके बाद, कई महीने बीत गए। फिर भी बीरबल को उसका इनाम प्राप्त नहीं हुआ, हालांकि वह शहंशाह को उनका वायदा बार-बार याद दिलाता रहा। जब भी वह उन्हें उनका वायदा याद दिलाता, वह अपना सिर दूसरी दिशा में घुमाकर अपनी गर्दन को कुछ इस तरह से झुका कर मोड़ लेते मानो वह कुछ सोच रहे हों। समय बीतने के साथ-साथ, बीरबल को अपना इनाम मिलने की आशा भी मद्दम पड़ती नज़र आई।
एक दिन, बीरबल शहंशाह अकबर के साथ शाही महल के बगल वाले जंगल में घुड़सवारी कर रहा था। तभी उन दोनों को सामने से अपनी ओर आता एक ऊंट दिखाई दिया। ऊंट को देख कर, शहंशाह ने कुछ समय तक सोचा और फिर बीरबल की ओर मुड़कर उससे असमंजस में पूछा, "बीरबल, इस ऊंट की गर्दन ऐसी टेढ़ी-मेढ़ी क्यों है? क्या तुम मुझे इसका कारण बता सकते हो?" -
इस प्रश्न ने बीरबल को वह अवसर दे दिया, जिसकी तलाश में वह बहुत दिनों से था। इसलिए उसने तुरन्त उत्तर दिया, "जहांपनाह, यह ऊंट पिछले जन्म में एक राजा था। इसका एक चतुर मंत्री था। एक बार यह अपने मंत्री की चतुराई से इतना प्रसन्न हुआ कि इसने उसे सौ एकड़ ज़मीन देने का वायदा किया। किन्तु वचन देकर यह उसे भूल गया हालांकि मंत्री इसे इसके जीवनकाल में बार-बार इसका वचन याद दिलाता रहा। किन्तु 'इसके कानों पर तो जूं तक न रेंगी। जब भी इसका मंत्री इसे इसका वायदा याद दिलाता, यह अपनी गर्दन को झुका कर दूसरी दिशा की ओर मोड लेता था। इसका पूरा जीवन इसी तरह अपने मंत्री की बात टालने में बीत गया। इस प्रकार, इसे अपना वायदा तोड़ने की सज़ा यह मिली है कि यह इस जन्म में टेढ़ी गर्दन वाले एक ऊंट के रूप में जन्मा है।"


"क्या बकवास है. यह? मैं यह सब नहीं मानता। कोई भी राजा अपना वचन कैसे भूल सकता है?" शहंशाह अकबर ने अविश्वास भरे स्वर में कहा।"क्यों नहीं? क्या आपने मेरी चतुराई से प्रसन्न होकर मुझे सौ एकड़ ज़मीन देने का वायदा नहीं किया था? और क्या यह बात सच नहीं कि आप अपना वायदा भूल चुके हैं? आप भी उस राजा की तरह ही व्यवहार करते हैं। जब भी मैं आपको आपका वायदा याद दिलाता हूं तो क्या आप भी अपने सिर को दूसरी ओर घुमा कर अपनी गर्दन को टेढ़ा नहीं करते? दूसरा राजा भी तो ऐसे ही करता था। उसका यही व्यवहार देखकर तो उसके मंत्री ने उसको श्राप दिया था कि वह अगले जन्म में टेढ़ी गर्दन वाला ऊंट बने। इस ऊंट की पिछले जन्म की कहानी सुनकर अब आप जान ही गए होंगे कि यदि आपने अपना वचन पूरा नहीं किया तो आपका क्या हाल होगा।" बीरबल ने स्पष्ट किया।
शहंशाह अकबर यह सब सुनकर बड़े लज्जित हुए। अपने घोड़े पर सवार होकर उन्होंने उसका मुंह फौरन अपने महल की ओर मोड़ा और बिना कुछ बोले, चुपचाप अपने राजमहल लौट गए। महल में पहुंचते ही, उन्होंने तुरन्त अपने महामंत्री को बुला भेजा और उसको आदेश दिया कि वह उसी समय बीरबल के नाम पर सौ एकड़ जमीन करने के लिए कागज़ तैयार करवाए। उनके आदेश का पालन करते हुए महामंत्री ने कुछ ही घंटों में बीरबल के नाम ज़मीन के कागज़ तैयार करवाए और उन्हें ले जाकर अकबर को थमा दिया। कागज़ हाथ में आते ही अकबर ने तुरन्त बीरबल को अपने विशेष कक्ष में बुलवाया। उसके आने पर उन्होंने ज़मीन के कागज़ उसके हाथ में थमाए और कहा, "मुझे आशा है कि अब मुझे अगले जन्म में टेढ़ी गर्दन वाले ऊंट के रूप में जन्म नहीं लेना पड़ेगा।" इस बात पर अकबर तथा बीरबल दोनों ही खिलखिला कर हंस पड़े।