नौकर ने चूना खाया-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 10,2021 03:43 AM posted by Admin

एक दिन बादशाह अकबर ने एक नौकर को दीवार से गिरा हुआ चूना उठाकर बाहर फेंकने का आदेश दिया। कार्य की अधिकता होने की वजह से वह बादशाह के आदेश का पालन नहीं कर सका। बादशाह ने दोबारा चने को उसी हालत में पड़ा देखा तो वह क्रोध से भड़क उठे और उस नौकर को बुलाकर बोले-"जाकर बाजार से एक सेर चूना ले आओ।" बादशाह के हावभाव देखकर नौकर को अपनी असावधानी की याद ताज़ा हो आई, पर वह करता भी क्या? वह दौड़ता हुआ बाज़ार जा ही रहा था कि सामने से आते हुए बीरबल ने उससे उसकी बदहवासी का कारण पूछा। नौकर ने सब हाल कह सुनाया। बीरबल ने सोचा कि सेर भर चूने का बादशाह. सुबह के वक्त क्या करेंगे? अवश्य ही नौकर की शामत आई है, वह यह चूना इसे ही खिलाएंगे।सोच-विचारकर बीरबल बोले-“देखो! सेर भर चूने की जगह पाव भर चूना और तीन पाव मक्खन लाना। चूने और मक्खन का रंग प्रायः एकसा होता है। उसमें कोई विशेष अन्तर नहीं मालूम होता। यदि बादशाह ने तुम्हें खाने की भी आज्ञा दी तो तीन पाव मक्खन के साथ पाव भर चूना खाने से तुम्हें कोई विशेष क्षति नहीं होगी।"

इस प्रकार बीरबल की सलाह मानकर नौकर ने वैसा ही किया। पाव मक्खन के साथ पाव भर चूने का मिश्रण लेकर नौकर बादशाह सामने उपस्थित हुआ। उन्होंने उसे चूना खाने का आदेश दिया। नौकर बहुत प्रार्थना करने पर भी जब बादशाह ने अपना हुक्म नहीं तोड़ा तो लाचा होकर वह मक्खन वाले पिण्ड को तोड़-तोड़कर खाने लगा। बीच-बीच में वह कुछ तकलीफ का बहाना करता जाता था कि शायद बादशाह द्रवित होकर अपना हुक्म वापस ले लें।जब नौकर आधा मक्खन खा चुका तो बादशाह को उसके अनिष्ट की चिन्ता हुई। उन्होंने विचार किया कि जब चूना इसके शरीर से फूटकर निकलेगा तो इसे असह्य वेदना होगी। बादशाह द्रवित हो गए और नौकर को बाकी चूना फेंक देने की आज्ञा दे दी।अंधे को और क्या चाहिए दो आंखें। बादशाह के हुक्म देने की देरी थी कि नौकर ने चूना दूर फेंक दिया ताकि बादशाह की निगाह उस पर न पड़ सके। कुछ समय पश्चात् नौकर प्रसन्नचित्त होकर पुनः काम में लग गया। यह देखकर बादशाह को बड़ा आश्चर्य हुआ। दूसरे दिन बादशाह ने पुनः उसी नौकर को एक सेर चूना लाने की आज्ञा दी। - राजा की आज्ञा पाकर नौकर बाजार से चूना लाने चल दिया। रास्ते में बीरबल का भवन था। उनसे मिलकर नौकर ने सारा हाल कह सुनाया और प्रार्थनापूर्वक आज भी बचने का उपाय पूछा।
कुछ देर सोच कर बीरबल बोले-"कुछ देर यहां ठहरने के बाद चूने के बजाय आज सारा मक्खन ही लेकर जाना। कल उन्होंने आधा खिलाया था, आज पूरा खाने को कहेंगे।" नौकर ने वैसा ही किया और सेर भर मक्खन लेकर हाज़िर हुआ।


उधर आज बादशाह ने नौकर को सारा चूना खाने की आज्ञा दी। नौकर ने कुछ ऐसा भाव बनाया, जिससे मालूम हो गया कि उसे चूना खाने पर बहुत कष्ट होगा। परन्तु बादशाह ने एक न सुनी और नौकर ने मक्खन खाना शुरू किया। जब सारा मक्खन खत्म हो गया तो उसने बड़े कष्ट में होने का स्वांग रचा। इस प्रकार बादशाह को भूल-भुलैया में डालकर वहां से मन-ही-मन पुलकित होता हुआ अन्यत्र जाकर बादशाह की दृष्टि से ओझल हो गया।आज तो बादशाह को पूर्ण विश्वास था कि नौकर अवश्य ही मरणासन्न अवस्था पर होगा। लेकिन जब वह उसे देखने गए तो चकित रह गए। नौकर हंसता-खेलता अपने काम में लगा हुआ था। बादशाह को सन्देह हो गया कि अवश्य ही दाल में कछ काला है। उन्होंने सोचा-"कल एक सेर चूना खाने के बाद भी इसके चेहरे पर कोई परिवर्तन नहीं हुआ था, इसलिए बादशाह ने इस रहस्य के सम्बन्ध में नौकर से पूछने का निश्चय किया।" नौकर को बुलाकर बोले-"आज तुम्हें चूना लाने में देर क्यों -हई थी? देखो! ठीक-ठीक बताना अन्यथा तुम्हें मृत्यु दण्ड मिलेगा।तब नौकर ने सच बोलने में ही अपनी खैरियत समझी और बारबल से ली गई सलाह के बारे सब कुछ बता दिया। नौकर की सच्चाई सुनकर बादशाह मुस्करा उठे और बीरबल की बुद्धि की दाद दी।