मुर्गा अंडे कैसे दे सकता है-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 09,2021 05:49 AM posted by Admin

एक दिन, अकबर ने बीरबल के साथ ठिठोली करके सबका मनोरंजन करने की सोची। इसके | लिए उन्होंने एक योजना बनाई | और उसके विषय में बीरबल के अलावा अन्य सभी दरबारियों को बता दिया। अगले दिन, वे सब बीरबल के साथ इस योजना के अनुसार शरारत करने के लिए तैयार हो गए। उस दिन राज्य संबंधी सभी काम पूरे करके उन सभी ने शाही बगीचे में जाने का निर्णय किया। वहां पहुंच कर उन्होंने कुछ समय तक इधर-उधर की बातें कीं और उसके बाद शहंशाह अकबर ने सबको बताया कि पिछली रात उन्होंने एक सपना देखा था।"जहांपनाह, आपके सपने अधिकतर सच होते हैं। इसलिए हमें बताएं कि आपने इस बार क्या सपना देखा?" दरबारियों ने एक स्वर में पूछा।  "इस बार मैंने सपने में देखा कि जो भी उस सामने वाले तालाब में कूद कर अंडा हाथ में लिए पानी से बाहर आएगा, वह एक ईमानदार तथा धार्मिक व्यक्ति होगा और उस पर परमात्मा की कृपा सदा बनी रहेगी।" शहंशाह ने तालाब की ओर इशारा करके गंभीरतापूर्वक उत्तर दिया।

बीरबल भी वहां मौजूद था, लेकिन वह यह सुन कर कुछ बोला नहीं। शहंशाह की बात सुन कर सभी दरबारी तालाब में कूद कर अपनी ईमानदारी तथा धार्मिकता का प्रमाण देने के लिए तैयार हो गए। किंतु शहंशाह ने उन सबको रोक दिया और बीरबल की ओर मुड़ कर, वे उससे बोले, "बीरबल, सबसे पहले तुम्हीं क्यों नहीं तालाब में कूद जाते?" यह सुनते ही, बीरबल को समझते देर न लगी कि अकबर सभी दरबारियोंके साथ मिल कर उसके साथ अवश्य कोई शरारत कर रहे थे। इसलिए वह बोला, "जहांपनाह, हम में से कोई भी आप से पहले पानी में कैसे कद सकता है? हमारे शहंशाह होने के नाते आपको ही सबसे पहले अपनी ईमानदारी तथा धार्मिकता को सिद्ध करने का अवसर मिलना चाहिए। आपके जाऊंगा।" बाद ही सभी दरबारियों को मौका मिलना चाहिए और मैं सबसे अंत मेंइस प्रकार शहंशाह अकबर ने थोड़ी ही देर बाद तालाब में छलांग लगा दी और कुछ ही समय बाद वह अपने हाथ में एक अंडा लिए तालाब से बाहर आ गए। यह देख कर सभी दरबारियों ने जम कर तालियां बजाईं। इसके बाद दरबारियों की कतार लग गई और एक-एक करके वे सभी तालाब में कूद गए और जल्दी ही हाथ में एक-एक अंडा लिए तालाब से बाहर आ गए पहले तो बीरबल शहंशाह के हाथ में अंडा देख कर स्तब्ध रह गया लेकिन उसे यह बात समझते अधिक समय न लगा कि उन सबके पास पानी में कूदने से पहले ही से एक-एक अंडा होगा। वह यह भी समझ गया कि यह सारी योजना शहंशाह की ही होगी। इसलिए उसने निर्णय लिया कि वह शहंशाह की शरारत को उन्हीं पर पलट देगा।


सबसे अन्त में, बीरबल की तालाब में कूदने की बारी आई। वह तालाब में कूद गया और कुछ ही समय पश्चात् कूकड़-कू, कूकड़-कू करता हुआ खाली हाथ तालाब से बाहर आ गया। शहंशाह अकबर तथा सभी दरबारी भी बीरबल की यह हरकत देख कर अचरज में पड़ गए। शहंशाह बीरबल का मजाक उड़ाने का मौका गंवाना नहीं चाहते थे। इसलिए वे बोले, "स्पष्ट है कि तम तालाब से अंडा लेकर नहीं निकले हो बीरबल। इसका अर्थ तो यही हुआ न कि तुम हम सबकी तरह ईमानदार एवं धार्मिक नहीं हो और इस बात से हमारा ध्यान हटाने के लिए ही तुम मुर्गे की तरह बांग दे रहे हो।"लेकिन बीरबल को शहंशाह द्वारा इस प्रकार नीचा दिखाया जाना बिल्कुल भी स्वीकार न था। इसलिए वह बोला, "सच्चाई यह है कि जहांपनाह कि मैं एक मुर्गा हूं, मुर्गी नहीं और आप तो जानते ही हैं कि केवल मुर्गियां ही अंडे दे सकती हैं। इसलिए मुझे तालाब में डुबकी लगा कर खाली हाथ ही लौटना पड़ा।" बीरबल की यह बात सुन कर अकबर तथा सभी दरबारी निरुत्तर हो गए। बीरबल ने उन्हें मुर्गियां बना दिया था, जिन्होंने तालाब में अंडे दिए थे। इस बात से लज्जित होकर उन सबने अपने सिर झुका लिए। इस प्रकार बीरबल ने उनके द्वारा की गई शरारत उलटे उन्हीं पर पलट दी।