माजरा क्या है-अकबर बीरबल की कहानी

माजरा क्या है-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 16,2021 08:40 AM posted by Admin

बादशाह अकबर के दरबारियों और अन्य सभासदों के बीच बीरबल हमेशा वाद-विवाद का विषय बने रहे। कछ सभासद एवं दरबारी तो बीरबल को बिल्कुल भी सहन नहीं कर पाते थे। वे हर वक्त उस समय का इंतज़ार हो सकेंगे। करते रहते थे कि कब बीरबल को उसके उच्च पद से हटाने में सफल ऐसे अवसर अक्सर आते भी रहते थे। एक बार बीरबल की अनुपस्थिात में बादशाह के कान भरने वालों ने एक स्वर में कहा-"हमारी समझ म आज तक नहीं आया जहांपनाह! कि हम लोगों में क्या कमी है? आखिर बीरबल को इतना महत्त्व क्यों दिया जाता है? जबकि हम लोग उससे कहीं अधिक पढ़े-लिखें हैं।" ।

उनकी बातें सुनकर बादशाह मुस्कराने लगे।उन्हें मुस्काराता देखकर एक सभासद बोला-"जहांपनाह! उस आदमी से आपको इतना लगाव क्यों है? क्या वह हमसे ज्यादा विद्वान है?""बहुत फर्क है उसमें और आप लोगों में।" बादशाह ने इस बार भी मुस्कराकर कहा।"हमें जानने की इच्छा है, हुजूर।" "अच्छा! क्या आप फर्क जानना चाहते हो?" "हां, हुजूर।फर्क दिखाया जाएगा। हां, इसी समय बीरबल के पास सूचना भेज दो कि वह सात दिनों के लिए छुट्टी पर रहे तथा दरबार में न आए। तुम लोगों में जो सबसे चतुर हो, वह उनके स्थान पर काम करे। इस एक सप्ताह में हम फर्क का अहसास करा देंगे।"फिर ऐसा ही किया गया।

उन लोगों में जो सबसे चतुर था, उसे बीरबल के स्थान पर नियुक्त कर दिया गया। बीरबल की सप्ताह भर के लिए छुट्टी कर दी गई। बादशाह उन सब की परीक्षा लेने का उचित अवसर खोजते रहे। एक सप्ताह खत्म होने को आ गया, तब बादशाह ने दरबारियों को एकत्र करके उनके द्वारा चुने गए उस चतर व्यक्ति से कहा-"हमारे महल के पिछले हिस्से में कुतिया के बच्चों की-सी आवाजें आती रहती हैं। देखकर आओ, माजरा क्या है?"

"बहुत अच्छा हुजूर।" कहकर चतुर व्यक्ति चला गया।थोड़ी ही देर के बाद वह लौटा।बादशाह ने मुस्कराकर पूछा-"क्या माजरा है?" "कुतिया ने बच्चे दिए हैं हुजूर, वे ही कू-कू करते रहते और "वे कितने बच्चे हैं?'' बादशाह ने पूछा। "हुजूर, मैंने तो गिने नहीं।" "जाओ, गिनकर आओ।"व्यक्ति आज्ञा पाकर दोबारा गया और थोड़ी देर बाद लौटकर "जहांपनाह! कुतिया ने पांच बच्चे दिए हैं। मैं स्वयं गिनकर आप"गिन आए?" "जी हां।""अच्छा, फिर तो तुमने यह भी ज़रूर देखा होगा कि उनमें कितने नर हैं और कितने मादा?" बादशाह ने मुस्कराकर कहा।वह चतुर व्यक्ति चकरा गया और बोला-"हुजूर! यह तो मैंने देखा नहीं।""देखकर आओ।"वह व्यक्ति तीसरी बार गया और बच्चों को देखकर आने के बाद बोला"हुजूर! दो नर और तीन मादा।""अच्छा, जो नर हैं, उनके रंग कैसे-कैसे हैं?" "जी?"

वह व्यक्ति पुनः वहां जाने के लिए मुड़ा। "मैंने दोनों नर बच्चों के रंग पूछे हैं।" बादशाह ने कहा।"जी, इस बात पर तो मैंने ध्यान ही नहीं दिया। वैसे उनमें से एक तो काला है। एक शायद सफेद है, मैं एक बार फिर देख आता हूँ।" इस प्रकार वह चतुर व्यक्ति चौथी बार गया और आकर बताया-"एक नर काला-सफेद है और दूसरा बादामी। मादा में से दो काली और एक बादामी है।""बैठ जाइए।" बादशाह ने कहा। वह व्यक्ति बैठ गया। "अब बीरबल को यहां बुलाया जाए।" बादशाह ने आदेश दिया।बीरबल ने आते ही कहा-"हुजूर! अभी तो एक दिन और बाकी है। मैं परसों अपने-आप ही आ जाता।"

"जरूरी काम है।" "सेवा बताइए।" बीरबल ने नम्र भाव से कहा।हमारे महल के पीछे के भाग में अजीब-सी आवाजें आती हैं-जैसे कभी कुतिया के भौंकने की, कभी कुतिया के बच्चों की कं-कं की, कभी गर्राने की। देखकर आओ, माजरा क्या है? ज़रा जल्दी लौटना।"अच्छा जहांपनाह।" बीरबल चले गए और थोड़ी देर बाद लाटा बादशाह ने प्रश्न किया-"क्या माजरा है?"कुतिया ब्याई है, पांच बच्चे दिए हैं, वे सब कू-कू करते हैं, कुतिया ती या भौंकती रही होगी रात में और कोई खास बात नहीं है वहा। "पांच बच्चे हैं, उनमें नर-मादा कितने-कितने हैं?" "दो नर, तीन मादा हैं।" बीरबल ने बताया। "उनका रंग कैसा है?"
"एक नर काला-सफेद दूसरा बादामी। दो मादा काला और एक बादामी है।बीरबल का उत्तर सुनकर बादशाह प्रसन्न हो गए।

उन्होंने अपने पर गर्व किया कि उन्हें एक बुद्धिमान व्यक्ति मिला है, जो उनके साथ रहता है। अपनी प्रसन्नता दबाए हुए वह बोले-"अब तुम लोग समझ गए होंगे कि तुममें और बीरबल में क्या फर्क है? क्यों श्रीमान् जी"जी!" उस व्यक्ति का सिर झुक गया। जिस काम को वह चार बार में कर सका और अढाई घंटे लगाये, बीरबल ने यह काम एक ही बार में केवल आधे घंटे में कर दिया था। वह समझ गया कि उनमें और बीरबल में क्या फर्क है। बीरबल ने जो मान-सम्मान पाया है, अपनी योग्यता के आधार पर पाया है।