हजाम की मूर्खता-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 09,2021 06:15 AM posted by Admin

बादशाह के दरबार में कई लोग ऐसे भी थे, जो बीरबल से ईर्ष्या करते थे। एक दिन उन सब ने मिल कर योजना बनाई। जब हजाम बादशाह की हजामत बनाने जाए तब बादशाह से कहे 'हुजूर, मैं एक ऐसा मन्त्र जानता हूँ जिससे जीवित आदमी भी स्वर्ग में जा सकता है। यदि आप चाहो तो किसी को भेज कर अपने बुजुर्गों की खैर ख़बर पूछ सकते हैं।' योजना के अनुसार हजाम ने बादशाह से कहा। बादशाह-'ठीक है, यदि यह बात है तो तुम जाकर उनका हाल-चाल पूछ आओ।'हजाम (घबरा कर)-'हुजूर, मैं तो बूढ़ा हो गया हूँ, यदि आप चाहें तो बीरबल को भेज दो। वह काफी समझदार है।'बादशाह-'यह ठीक कहा तूने।' (दूसरे दिन दरबार में)। 'बीरबल, हम चाहते हैं कि आप स्वर्ग में जाकर हमारे बड़े बुजुर्गों की खैर-खबर ले कर आओ', बादशाह ने बीरबल को कहा। 'यदि उनको किसी चीज़ की कमी हो तो हमें आ कर बताना।' बीरबल अपने विरोधी दरबारियों को देख कर बोले, "जो हुकम हुजूर का।"मुकर्र दिन के अनुसार बीरबल को चिता में बिठा कर उसके लकड़ियाँ डाल कर नीचे से आग लगा दी। फिर कुछ दिन बाद बीर दरबार में हाज़िर हुआ।

बादशाह ने बीरबल को दरबार में आया देख कर पूछा-स्वर्ग से का वापिस आए बीरबल?मैं सीधा वहाँ से ही आ रहा हूं। बीरबल ने उत्तर दिया।बादशाह-"हमारे बड़े बुजुर्ग कैसे हैं? वहाँ उन्हें किसी चीज़ की ज़रूरत तो नहीं?" बीरबल-"और तो सब ठीक है, पर स्वर्ग में हजामत करने वाला नहीं है।" इसलिए उनको हजामत करने में बड़ी मुश्किल होती है।बादशाह-"कोई बात नहीं, हम अपने शाही हजाम को भेज देते हैं।" दरबार ख़त्म होने के बाद हजाम ने बीरबल के पैर पकड़ लिये। हजाम-'बीरबल जी, मुझे बचा लो। मैंने दरबारियों के पीछे लग कर यह गलती कर दी है मुझे माफ़ कर दो। कहीं बादशाह मुझे सचमुच ही न मरवा दें।' बीरबल बोला-'मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ?"बीरबल जी, बस एक आप ही मेरी जान बचा सकते हैं।" हजाम ने डरते हुए कहा-"परन्तु बीरबल जी, आप बच कैसे गये?"बीरबल-'बेवकूफ, मुझे पहले ही पता लग गया था कि दाल में कुछ काला है। इसीलिए मैंने पहले ही चिता के नीचे एक सुरंग बनवा ली थी। सुरंग के रास्ते से निकल कर मैं वापस आ गया।'
यह सुन कर हजाम बहुत शर्मिंदा हुआ और अपने किये पर बार-बार माफ़ी मांगने लगा।